दो हजार वर्ग फुट का बहुउद्देशीय सभागार न होने के चलते उत्तराखंड के दस डायट सेंटर की मान्यता अटक गई है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के अधिनियम 2014 के तहत इस शर्त को पूरा किए बगैर डायट सेंटर को मान्यता नहीं मिल सकती है। अब इस परेशानी से निजात के लिए उत्तराखंड सरकार ने केंद्र सरकार ने इस अधिनियम की शर्तों को लचीला बनाने की मांग रखी है।
खास बात यह है कि प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर के अलावा पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की भौगोलिक परिस्थिति के आधार पर डायट के लिए अलग से नए नियम बदलने की भी मांग रखी है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देशभर के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने और गुणवत्ता लाने के लिए डायट को एक प्लेटफार्म पर लाने के लिए बेशक प्रशिक्षक अध्यापक शिक्षा पोर्टल शुरू कर दिया हो लेकिन उत्तराखंड प्रदेश के 13 डायट सेंटर में से महज तीन डायट सेंटर ही उससे जुड़ सकेंगे। क्योंकि उनमें से दस को एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) की मान्यता नहीं मिली है।
शिक्षा मंत्री ने की नियमों को लचीला करने की मांग
उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के मुताबिक, केंद्र सरकार से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम 2014 की शर्तों में बदलाव लाने के साथ उन्हें लचीला बनाने की मांग रखी है। प्रदेश सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को लिखा है कि सख्त शर्तों के चलते उत्तराखंड में दस डायट सेंटर को मान्यता नहीं मिल पाई है क्योंकि मानक के तहत बहुउद्देशीय सभागार के लिए इन दस डायट सेंटरों में दो हजार वर्ग फुट की जगह नहीं है।
पहाड़ी क्षेत्रों के राज्यों में दो हजार वर्ग फुट की जगह मिलना संभव नहीं होता है। ऐसे में डायट सेंटर को एनसीटीई की मान्यता नहीं मिल पाएगी। हालांकि इन सेंटर में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण तो दिया जा रहा है, लेकिन डायट सेंटर में प्रशिक्षकों के पदों पर भरती नहीं हो सकती है। जब प्रशिक्षक नहीं होंगे तो फिर शिक्षकों को स्पेशल ट्रेनिंग कैसी दी जाएगी। मालूम हो कि फिलहाल नैनीताल, उधम सिंह नगर और देहरादून जिले के डायट सेंटर को मान्यता है। जबकि अन्य दस जिलों के दस डायट सेंटर को नहीं।