एमबीबीएस दाखिलों में निर्धारित से ज्यादा शुल्क वसूलने वाले प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद शासन ने कॉलेजों को ब्याज सहित वसूली गई अधिक फीस लौटाने के निर्देश दिए हैं। अगर ऐसा न हुआ तो मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
इस साल निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कॉमन प्रवेश परीक्षा नीट से दाखिले किए गए थे। निजी मेडिकल कॉलेजों ने अपने स्तर पर काउंसिलिंग आयोजित कराई थी। कुछ कॉलेजों में सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक पैसा वसूला गया। इन कॉलेजों की शिकायतें शासन तक पहुंची। शासन ने मामले में जांच बैठा दी थी।
काउंसलिंग के दौरान ही जांच शुरू हो गई थी और जांच टीम कॉलेजों में भी पहुंची थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट सचिव चिकित्सा शिक्षा को सौंप दी है। सचिव चिकित्सा शिक्षा डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि शुल्क निर्धारण का अधिकार प्रदेश सरकार को है।
कॉलेज सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क ही ले सकते हैं। जितनी भी शिकायतें निर्धारित से अधिक शुल्क वसूलने की आई हैं, उन सभी पर कार्रवाई की जा रही है। कॉलेजों को निर्देश दिए गए हैं कि वह ऐसे छात्रों का पैसा तत्काल ब्याज सहित लौटा दें। अगर ऐसा न किया तो शासन स्तर से इन कॉलेजों की मान्यता रद्द करने को एमसीआई को पत्र भेज दिया जाएगा। सचिव पांडियन ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय की ओर से एक जनहित याचिका पर दिए गए आदेशों के तहत भी यह कार्रवाई की जा रही है।
2018 तक तय है शुल्क
शुल्क निर्धारण समिति ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए शुल्क वर्ष 2018 तक तय की हुई है। समिति ने तय किया हुआ है कि सभी निजी मेडिकल कॉलेजों में पांच लाख रुपये से अधिक सालाना शुल्क नहीं वसूला जा सकता। इसके बावजूद कॉलेजों ने 14 लाख रुपये तक शुल्क वसूल लिया था।