12वीं के बाद इंटिग्रेटेड एलएलबी और एलएलबी के बाद एलएलएम में दाखिले के लिए होने वाले कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट 2019) का आयोजन इस बार ऑफलाइन होगा। यह तय किया गया है कि अब जब तक अभ्यर्थियों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी नहीं होती, तब तक क्लैट को ऑनलाइन मोड में नहीं लाया जाएगा।
कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की चौथी बैठक में क्लैट को लेकर कई अहम फैसले हुए। बैठक की एक सूचना जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि 12 मई को होने वाली क्लैट का आयोजन ऑफलाइन किया जाएगा। यह बदलाव इसलिए किया गया है क्योंकि हर साल ऑनलाइन क्लैट में तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इस बार भी क्लैट में भारी तकनीकी दिक्कतें आई थीं, जिसके बाद यह मामला हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक गया था। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि क्लैट की एक स्थाई वेबसाइट का निर्माण किया जाएगा।
इस साल एलएलएम की परीक्षा में सब्जेक्टिव प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे। प्रश्न पत्र की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक क्वैश्चयन बैंक तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी लॉ यूनिवर्सिटी का सहयोग लिया जाएगा। इसके अलावा क्लैट के परीक्षा केंद्र बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। कुछ और शहरों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जा सकते हैं। इस पर अंतिम फैसला कार्यकारिणी समिति लेगी। बैठक में विधि विश्वविद्यालयों के मानकीकरण के लिए नैक व यूजीसी के साथ एक कार्यशाला आयोजित करने पर भी सहमति बनी।
विशेषज्ञों ने किया स्वागत
क्लैट को ऑफलाइन करने के फैसले का दून के परीक्षा विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। लॉ प्रेप दून के निदेशक एसएन उपाध्याय का कहना है कि इससे अभ्यर्थियों को लाभ होगा। हर साल वह तकनीकी दिक्कतों की वजह से परीक्षा में उलझ जाते थे और उनका समय बर्बाद हो जाता था। टाइम इंस्टीट्यूट के निदेशक राजीव कुकरेजा के मुताबिक, क्लैट ऑनलाइन कराने से पहले इसकी पुख्ता तैयारी होनी चाहिए। ऑफलाइन में अभ्यर्थी अब एग्जाम को पूरा समय दे पाएंगे।