अब संस्कृत से 12वीं पास करने वाले छात्र भी आयुर्वेद चिकित्सक बन सकेंगे। अभी तक बैचलर ऑफ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) के लिए 12वीं में विज्ञान विषय अनिवार्य था। लेकिन, जल्द ही यह मानक बदलने जा रहा है।
इस फैसले के बाद पारंपरिक गुरुकुलों, संस्कृत विद्यालयों, संस्कृत महाविद्यालयों के छात्रों के आयुर्वेद चिकित्सक बनने की राह आसान हो जाएगी। इन छात्रों को बीएएमएस कोर्स के दौरान पहले एक साल विज्ञान की पढ़ाई कराई जाएगी।
मदरसा बोर्ड के छात्र भी इसी पैटर्न पर यूनानी चिकित्सक बनते हैं। इसी तर्ज पर संस्कृत छात्रों को आयुर्वेद में शिक्षित करने की प्रक्रिया केंद्र सरकार ने आगे बढ़ा दी है। इस संबंध में मई के अंतिम सप्ताह में हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आचार्य बालकृष्ण की अध्यक्षता में सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) की बैठक हो चुकी है।
बैठक में शामिल रहे विश्व आयुर्वेद परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और संस्कृत भारती के प्रांत प्रमुख डा. प्रेमचंद शास्त्री ने बताया कि तय किया गया कि अब बीएएमएस के लिए 12वीं में विज्ञान के अलावा संस्कृत को भी अर्हता की श्रेणी में रखा जाएगा।