उत्तराखंड में राफ्टिंग के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड में राफ्टिंग गतिविधि को शुरू करने के लिए तत्काल प्रभाव से अनुमति दे दी है।
हालांकि, ग्रीन बेंच ने कहा है कि जब तक राज्य सरकार पर्यावरण संबधी हमारे आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं करती तब तक कौड़ियाला से ऋषिकेश तक कैंपिंग गतिविधि नहीं की जा सकेगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एनवॉयरमेंट (सेफ) की याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।
ग्रीन बेंच ने कहा कि कौड़ियाला से ऋषिकेश तक पूरे क्षेत्र में सरकार ग्रीन ट्रिब्यूनल में 31 मार्च 2015 को दिए गए अपने बयान के मुताबिक आदेशों का पालन नहीं करती तब तक किसी भी तरह की कैंपिंग गतिविधि नहीं होगी। ग्रीन पैनल ने कहा कि राफ्टिंग से किसी भी तरह का गंभीर पर्यावरण प्रदूषण और नदी को नुकसान नहीं पहुंचता इसलिए हम राफ्टिंग गतिविधि के लिए तत्काल प्रभाव से अनुमति देते हैं।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने कौड़ियाला से ऋषिकेश क्षेत्र में पूरी तरह से प्लास्टिक उत्पादों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही कहा कि यह पूरा क्षेत्र एनजीटी के आदेश के अधीन होगा। मालूम हो कि सेफ की ओर से एडवोकेट राहुल चौधरी ने अपनी याचिका में कहा था कि नदी किनारे राफ्टिंग के लिए सैकड़ों कैंप बने हैं।
इससे न सिर्फ पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है बल्कि वन्य जीवों को भी परेशानी हो रही है। इसके बाद ग्रीन बेंच ने राफ्टिंग और कैंप गतिविधि दोनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
राज्य द्वारा कैंप संबंधी लाइसेंस पर यह होगी शर्त
एनजीटी ने कहा कि राज्य सरकार जिसे भी कैंप संबंधी लाइसेंस और अनुमति देगी उसमें यह अनिवार्य शर्त होगी कि संबंधित व्यक्ति, फर्म ठोस कचरे और अन्य कचरे का पूरी तरह प्रबंधन करेगा। साथ ही इस प्रबंधन के लिए संबंधित फर्म, व्यक्ति कंपनी खुद ही खर्च का वहन भी करेगी। इसके अलावा इन्हें ठोस कचरे की डंपिंग के लिए परिवहन का जरिया और जगह भी तय करना होगा।
कमेटी गठित, तीन हफ्तों में मांगी रिपोर्ट
पैनल ने केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों को मिलाकर एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी को पर्यावरण, वन्यजीव, नदी और पारिस्थितिकी जैसे मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी है। कमेटी को कैंपिंग गतिविधियों के लिए जगहों की पहचान भी करनी होगी साथ ही यह भी बताना होगा कि किन विधि और व्यवस्थाओं से इस तरह की गतिविधि चले।
कमेटी में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव रैंक से नीचे के अधिकारी नहीं होंगे। इसके अलावा कमेटी में उत्तराखंड के पर्यावरण विभाग के सचिव, सीपीसीबी के सदस्य सचिव, संबंधित इलाकों के मुख्य वन्य संरक्षक अधिकारी, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक रहेंगे। वहीं इस कमेटी में उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
कमेटी से मांगी राफ्टिंग गतिविधि से जुड़ी सिफारिशें
ग्रीन पैनल ने कहा कि यह कमेटी रैपिड इंपैक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट तैयार करेगी। कमेटी की रिपोर्ट को एक मजबूत दस्तावेज माना जाएगा। कमेटी पर्यावरण और जुड़े हुए अन्य मुद्दों पर अपनी सिफारिशें भी दे सकती है। यदि कमेटी को लगता है कि राफ्टिंग के लिए किसी तरह के स्टेशन की जरूरत है तो वह सुझाव दे सकती है। हालांकि, इस तरह के स्टेशन बहुत सीमित कामों के लिए होंगे। बिना किसी इंफ्रास्ट्रक्चर के इन स्टेशनों का काम आगंतुकों को पिक और ड्रॉप करना भर होगा।
नदी के 100 मीटर के भीतर निर्माण पर रोक
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि नदी के 100 मीटर क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होगा। साथ ही प्राधिकरण यह सुनिश्चित करे कि स्थायी और अस्थायी किसी भी तरह की संरचना नदी के 100 मीटर दायरे में न बने।