रिपोर्ट में नमामि गंगे योजना की कमियों को भी उजागर किया गया। कैग यह तथ्य भी सामने लाया कि शराब का उत्पादन करने वाली प्रदेश की तीन डिस्टलरियों (शराब फैक्ट्री) ने पर्यावरणीय मानकों की धज्जियां उड़ाई लेकिन उनसे जुर्माना नहीं वसूला गया। जिससे 346.53 करोड़ रुपये की चपत प्रदेश को लगी।
कैग ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के टैक्सी बिल घोटाले का भी पर्दाफाश किया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि टैक्सी के नाम पर जो बिल प्रस्तुत किए गए थे, वे स्कूटर और तिपहिया वाहनों के निकले।
रिपोर्ट में ऐसी ही कई अन्य अनियमितताएं सामने आई हैं। सदन पटल पर रिपोर्ट आने के बाद उत्तराखंड के महालेखाकार (लेखा परीक्षा) एस. आलोक ने भी पत्रकार वार्ता की, जिसमें उन्होंने रिपोर्ट के संबंध में सिलसिलेवार जानकारी दी।
- गंगा नदी की स्वच्छता के लिए 25 से 58 फीसदी बजट इस्तेमाल नहीं हुआ
- 132 ग्राम पंचायतों में 265 गांवों को खुले में शौच से मुक्ति का दावा गलत निकला
- वर्ष 2017 में 50 प्रतिशत के सापेक्ष 14.71 प्रतिशत बसावटों को ही 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन मिला पानी
- 185 करोड़ की 20 योजनाओं को पूरा करने में 5 से 12 साल लगे, हुआ वित्तीय नुकसान
- स्वास्थ्य विभाग में 1.25 करोड़ का गबन, स्कूटर के नंबर पर टैक्सी के बिल बनाए गए
- खराब प्रबंधन की वजह से यूपीसीएस की वितरण हानि 240.91 करोड़ रुपये तक थी
- बिजली परियोजनाएं समय पर बनाने में विफल होने से टैरिफ वृद्धि से धोना पड़ा हाथ