एडीएम केके मिश्र ने बताया कि वॉल पेटिंग और नुक्कड़ नाटक के जरिये योजना का प्रचार प्रसार किया जाएगा। गांव में बैठकें कर ग्रामीणों को योजना की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद चूनाकरण और फिर सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से ड्रोन सर्वे कराया जाएगा। मैपिंग में रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ग्रामीणों की आपत्ति लेने के बाद सुनवाई होगी। इसके बाद कार्ड जारी किए जाएंगे।
समझिए स्वामित्व योजना
योजना का मकसद गांव में रहने वाले लोगों को उनके घरों की भूमि के दस्तावेज उपलब्ध कराना है। डीपीआरओ रमेश चंद त्रिपाठी ने बताया कि गांव में कुछ भूमि ऐसी है, जिस पर ग्रामीण पीढ़ी दर पीढ़ी रहते आ रहे है, लेकिन भूमि का उनके पास कोई दस्तावेज नहीं है। भूमि पर स्वामित्व के हक के लिए उनको प्रॉपर्टी कार्ड दिए जाएंगे। इसके बाद प्रॉपटी को लेकर विवाद भी खत्म हो जाएंगे।
पंचायतों को ये होगा फायदा
1. संपत्ति का टैक्स के दायरे में आना और टैक्स वसूलना संभव होगा।
2. इस आमदनी से पंचायतें ग्रामीण नागरिकों को बेहतर सुविधा दे पाएंगी।
ग्रामीणों को ये होंगे फायदे
1. संपत्ति के मालिक को मालिकाना हक प्राप्त होगा।
2. ग्रामीण अपनी संपत्ति का वित्तीय उपयोग ऋण लेने में सक्षम होंगे।
3. गांव के आवासीय क्षेत्र का रिकॉर्ड पंचायतों को प्रदान कर सकेंगे।
इन गांवों में किया गया चूनाकरण
शुक्रवार को पंचायतीराज विभाग की ओर से रुड़की ब्लॉक के तांशीपुर, भारापुर और भौरी में चूनाकरण किया गया। डीपीआरओ रमेश चंद त्रिपाठी ने बताया कि योजना को पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।