प्रसिद्ध श्री महासू देवता मंदिर हनोल में देवता की आज्ञा से घांडुवा (बकरा) चढ़ाने पर रोक लगा दी गई है। मंदिर में वर्ष 2010 से पशुबलि प्रथा बंद है। बृहस्पतिवार को बावर क्षेत्र की छह खतों और बंगाण की तीन पट्टियों से पहुंचे देवता के कारिंदों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में इसकी घोषणा की गई। मंदिर में 19 से 21 नवंबर तक होने वाली स्वर्ण कलश स्थापना को लेकर भी तैयारियों पर चर्चा हुई।
स्वर्ण कलश स्थापना के आयोजन को लेकर हनोल में हुई बैठक में बावर खत, शिलगांव, फनार, लखौ, बाणाधार और देवघार समेत छह खतों तथा बंगाण क्षेत्र की तीन पट्टियों के प्रतिनिधियों ने व्यवस्थाओं की रूपरेखा तय की। शांठीबिल के बजीर दीवान सिंह राणा और बावर खत के सदर स्याणा चमन सिंह चौहान ने बताया कि देवता की आज्ञा से घांडुवा चढ़ाने की परंपरा पर रोक लगाई गई है। श्रद्धालु इसके विकल्प के रूप में जटा नारियल चढ़ा सकेंगे। घांडुवे के निर्धारित मोल या चढ़ावे की धनराशि मंदिर समिति कार्यालय में जमा कर रसीद भी प्राप्त की जा सकेगी। धार्मिक अनुष्ठान में जौनसार-बावर, बंगाण, यमुना घाटी, पछवादून और हिमाचल के सिरमौर-शिमला समेत अन्य क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। समिति ने भोजन, सुरक्षा, पेयजल, पथ प्रकाश और यातायात व्यवस्था को लेकर भी चर्चा की।
बैठक में सदर स्याणा चमन सिंह, पांशीबिल के बजीर जयपाल सिंह पंवार, स्याणा सुनील राणा, स्याणा किशन सिंह, स्याणा रणेश्वर सिंह, स्याणा भुवनेश्वर पंवार, स्याणा संतराम चौहान, स्याणा सूरतराम जोशी, सचिव मोहनलाल सेमवाल, हरिश्चंद्र राणा, स्याणा अर्जुन सिंह रावत, धीरज सिंह राणा, नरेंद्र नौटियाल, विक्रम सिंह राजगुरु आदि मौजूद रहे।