देहरादून में इंपोर्टेड यानी आयातित सेब का कारोबार ठंडा पड़ गया है। डॉलर के मुकाबले रुपए की जबरदस्त गिरावट से इनकी डिमांड बेहद कम रह गई है, लिहाजा आपूर्ति भी आधी से कम रह गई है।
कारोबारी महज दो-तीन डिब्बों के सहारे लगभग महीने भर से काम चला रहे हैं। अब उन्हें इंतजार त्योहारी सीजन का है, ताकि शादी-ब्याह और दूसरे मौके पर इंपोर्टेड सेब के कारोबार में एक बार फिर बहार आ सके।
अपने ग्राहकों की राह ताक रहे
एक डिब्बे में तकरीबन 20 किलो सेब आता है और उसे लगभग सौ दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। ऐसे में एक-दो माह पहले मंगाए गए सेब कारोबारियों की स्टोरेज में अपने ग्राहकों की राह ताक रहे हैं।
डिमांड कम होने की एक वजह रुपए का कमजोर होना भी माना जा रहा है। पहले जो सेब लगभग 2800 रुपये प्रति डिब्बा तक पड़ रहा था, अब वह 3000 रुपये भी अधिक में पड़ रहा है।
हिमाचल का सेब आने से भी पड़ा फर्क
राजधानी में हिमाचल प्रदेश, कश्मीर का सेब आने से भी इंपोर्टेड सेब की मांग पर असर पड़ा है। दरअसल, इन दोनों राज्यों का सेब क्वालिटी के लिहाज से बढ़िया माना जाता है।
विदेशी फलों में सेब, अंगूर और कीवी आ रहे हैं, लेकिन इनकी डिमांड बेहद कम रह गई है। रुपया अब बेहद गिर गया है। उम्मीद है कि सीजन अब नवंबर में अपने शबाब पर होगा।
- बलदेव, विदेशी फल कारोबारी
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