ऊधमसिंह नगर के गदरपुर बस अड्डा निर्माण के लिए भूमि खरीदने को जारी 1.70 करोड़ रुपये का गोलमाल हो गया है। जहां बस अड्डा बनना था, वहां अभी तक एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी है। अलबत्ता भूमि खरीद करने का पैसा जरूर हजम हो गया है। सचिव परिवहन शैलेश बगौली ने मामले में निगम के प्रबंध निदेशक को प्रकरण की जांच करने के आदेश दिए हैं।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह प्रकरण तब सामने आया जब प्रदेश में स्वीकृत बस अड्डो के प्रस्तावों की समीक्षा हुई। समीक्षा के दौरान शासन के संज्ञान में आया कि वित्तीय वर्ष 2010-11 में गदरपुर में एक बस अड्डे का निर्माण होना था। इसके लिए 1.12 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई थी, इसमें वन भूमि भी शामिल थी। इस भूमि की खरीद के लिए एक करोड़ 70 लाख 61 हजार रुपये शासन स्तर से जारी किए गए थे। इसबीच परिवहन विभाग को चिन्हित स्थल से पांच किमी के फासले पर राजस्व विभाग से भूमि प्राप्त हो गई।
इस भूमि पर उत्तराखंड परिवहन निगम को भूमि की खरीद करने को कोई धनराशि खर्च नहीं करनी पड़ी। इस लिहाज से निगम को जिस मद में 1.70 करोड़ की धनराशि जारी हुई थी, उसी हैड में उसे शासन को लौटाना था। लेकिन शासन के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि बस अड्डा निर्माण के प्रथम चरण की प्रक्रियात्मक कार्यों की राशि को अन्यत्र मदों में खर्च कर दिया गया। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो निगम की ओर से यह सफाई दी गई कि शासन से उच्च स्तर पर मौखिक आदेश पर धनराशि खर्च की गई। इसबीच उक्त प्रकरण के संबंध में वित्त विभाग से भी परामर्श लिया गया। वित्त विभाग ने मामले में उत्तरदायित्व निर्धारित करने का परामर्श दिया। इस संबंध में एक जांच समिति गठित करने के भी आसार हैं।
गदरपुर में काफी समय पूर्व बस अड्डा बनाने के लिए भूमि खरीदने के लिए धनराशि जारी की गई थी। संज्ञान में आया है कि उक्त धनराशि दूसरी मदों में खर्च कर दी गई। मैंने उत्तराखंड परिवहन निगम के एमडी को जांच के आदेश दे दिए हैं।
- शैलेश बगौली, सचिव, परिवहन