हरिपुर-कोटी-मीनस-क्वानू मोटरमार्ग पर सोमवार को कच्चा पुश्ता बैठने से एक बस 300 मीटर गहरी खाई की ओर झुक गई। इस दौरान बस में सवार 25 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। यात्री एक-एक कर किसी तरह बस से बाहर निकले। मोटरमार्ग पर पहले से ईंटों से भरा ट्रक सड़क के बीच में फंसा हुआ था। बस चालक ने यात्रियों और अपनी जान की परवाह किए बिना बस को कच्चे पुश्ते से निकालने की कोशिश की। गनीमत रही बस पुश्ते में ही फंसी, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था।
जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह हिमाचल प्रदेश रोडवेज की बस हरिद्वार से शिमला की ओर जा रही है। सुबह करीब 8.00 बजे बस हरिपुर-कोटी-मीनस-क्वानू मोटरमार्ग पर पाथुवा खेड़ा स्थित टिमरी गांव के पास पहुंची। यहां ईंटाें से भरा एक ट्रक तकनीकी खराबी के चलते सड़क के बीच में फंस गया था। बस चालक संभावित खतरे के बावजूद कच्चे पुश्ते से बस को निकालने का प्रयास किया। इस दौरान पुश्ता अचानक से बैठ गया और बस खाई ओर झुक गई। लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। यात्रियों ने एक-एक कर बस से उतरना शुरू कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों और यात्रियों ने बस को धक्का देकर पुश्ते से बाहर निकाला। इस बीच सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। करीब एक घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। बस जिस जगह पुश्ते पर अटकी थी, वहां 300 मीटर गहरी खाई थी। खाई के नीचे टोंस नदी बहती है। अगर बस खाई में गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
पहले भी हुई हैं दो बड़ी बस दुर्घटनाएं, 56 यात्रियों की हुई थी मौत
वर्ष 2016 के सितंबर में त्यूणी के कथियाण से देहरादून जा रही एक निजी बस त्यूणी-चकराता राजमार्ग पर दारागढ़ के पास अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई थी। हादसे में 12 यात्रियों की मौत हो गई थी। वहीं, 35 यात्री घायल हो गए थे। अब इसी मार्ग को त्यूणी-चकरात-मलेथा राष्ट्रीय राजमार्ग के नाम से जाना जाता है। वर्ष 20217 के अप्रैल में जेपीआरआर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुम्मा के पास एक निजी बस हिमाचल प्रदेश के गुमा के पास अनियंत्रित होकर टोंस नदी में गिर खाई। बस में 56 यात्री सवार थे। इनमें से 44 की मौत हो गई थी।