राजधानी लौट रही देहरादून एक्सप्रेस में आग लगने की घटना रेल में सवार लोगों से एक पल के लिए भी भुलाई नहीं जा रही है।
हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था...
देहरादून सुरक्षित लौटे लोगों अभी भी उस सदमे से बाहर नहीं निकले हैं। अमर उजाला ने प्रत्यक्ष दर्शियों से बात की।
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बांद्रा एक्सप्रेस (देहरादून एक्सप्रेस) के एक मुसाफिर आर्मी में सिपाही रमाशंकर दोस्त से मिलने दून आ रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें एक पागल महिला पर शक है।
वह टायलेट के किनारे बीड़ी पी रही थी। उसने ही आग लगाई होगी। रमाशंकर ने बताया कि मैं गहरी नींद में था तभी तेज धमाका हुआ और आंखें खुलीं तो हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था।
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पल भर के लिए कुछ समझ में ही नहीं आया। फिर देखा बगल में बैठा यात्री सामान समेट कर भाग रहा है। बोगी में धुंआ भरने लगा था। मैं भी जान बचाने के लिए भागा।
रमाशंकर के साथ ही तीन अन्य यात्री दून पहुंचे। गुरुवार रात दस बजे ट्रेन दून पहुंची तो यात्रियों के चेहरों पर हादसे का खौफ भी दिखा और राहत की खुशी भी। यात्री बोले, यह उनका नया जन्म है।
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अपनी बहन से दून मिलने आ रहे जवाहर आक्रोश में थे। बोले इस हादसे में नौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई होगी। जवाहर ने बताया कि एक बार उन्हें लगा कि मौत सामने खड़ी है। लेकिन किसी तरह हिम्मत जुटाकर जान बचाई। उन्होंने बताया कि अधिकांश लोगों की मौत धुंए से हुई है।
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मारुति नाइक ने बताया मैं सोया नहीं था। हमारे कोच में ही सबसे पहले आग लगी थी। जैसे ही आग के शोले दिखे हमने चेन खींच दी। उसके बाद ट्रेन से कूद गए। लेकिन बाद में फिर से ट्रेन में चढ़ गए और कई लोगों को बचाया भी। उन्होंने बताया कि हादसे के दस मिनट बाद ही मदद भी आ गई थी।