उत्तराखंड सरकार ने बेशक महंगाई का हवाला दे मंडी शुल्क खत्म कर दिया हो, लेकिन इससे आम आदमी को राहत मिलने में संदेह है।
पढ़ें, 2014 की शुरुआत में ही 'बरसे' शुभ संकेत
उल्टे किसानों की परेशानी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मंडी के जानकारों की मानें तो कीमतों पर मंडी का नियंत्रण रहता था, मोबाइल टीमें भी ज्यादा वसूली पर निगाह रखती थी, लेकिन अब ऐसा न होने से महंगाई का बोझ आम आदमी पर उल्टे बढ़ेगा।
पढ़ें, मोदी के गुजरात को पछाड़ देगा उत्तराखंड का यह गांव
मंडी शुल्क की समाप्ति को लेकर जारी जीओ समिति के पास पहुंच गया है। लिहाजा, बुधवार को मंडी शुल्क नहीं वसूला गया। इसमें फल, सब्जी की 49 प्रजातियों को गैर-अधिसूचित कर दिया गया है।
पढ़ें, अगर पानी-बिजली का बिल आए तो जमा न करें!
किसानों के लिए किसी भी जगह उत्पाद बेचने की बात को भी वह गैर-व्यावहारिक करार देते हैं। आढ़ती अनिल के अनुसार किसी भी सब्जी बेचना काश्तकार के लिए इसलिए नुकसानदेह होगा, क्योंकि उसे सही दाम मिलने में संदेह है।
पढ़ें, सावधान आपदा के निशाने पर है एक और धाम
इसके उलट फल, सब्जियों की जमाखोरी और बढ़ जाएगी। जीओ के बाद से समिति के पास केवल गन्ने और लकड़ मंडी का काम बाकी रह जाएगा। मंडी समिति के सचिव विजय प्रसाद थपलियाल के अनुसार जीओ आ गया है। तद्नुसार कार्रवाई हो रही है।