जिले का सबसे बड़ा मंदिर होगा
बूंखाल कालिंका चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस बार मेला शनिवार 6 दिसंबर को लगेगा। मंदिर समिति के ट्रस्टी सतेंद्र रावत ने बताया कि करीब दो करोड़ की धनराशि से मंदिर का भव्य निर्माण किया जा रहा है। सचिव कमल रावत व कोषाध्यक्ष कमल चौहान ने बताया कि मंदिर का निर्माण अगले वर्ष 2026 तक पूरा होने की संभावना है। यह जिले का सबसे बड़ा मंदिर होगा।
मेले में ध्याणियों को होता है विशेष न्योता
क्षेत्र के करीब 30 से 35 गांवों की ध्याणियों (बेटियों) को मेले के लिए विशेष रूप से न्योता भेजकर मायके बुलाया जाता है। ससुराल वापसी पर ध्याणियों को दूण कंडे के साथ सम्मान से विदा किए जाने की प्राचीन परंपरा है। देवी की पूजा हर साल दिसंबर माह के प्रथम शनिवार को ही आयोजित करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। मान्यता है कि दक्षिण काली के रूप में पूजित मां बूंखाल कालिंका को शनिवार के दिन पूजने से हर मनोकामना पूरी होती है।
पौड़ी के अन्य मेले
- कोट ब्लॉक का मंजूघोष, मनसार व डांडा नागराजा मेला।
- खिर्सू ब्लॉक का कठबद्दी मेला।
- कल्जीखाल ब्लॉक का घुसगलीखाल मेला।
- पाबौ का खुड्डेश्वर मेला।
- परसुंडाखाल का मकरैंण मेला।
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