वन भूमि पर बकायदा खेती की जा रही
अमर उजाला से बातचीत में डॉ. धकाते ने बताया कि विशेष अभियान के तहत अभी तक 56 हेक्टेयर वन भूमि से अतिक्रमण हटा दिया गया है। इनमें धार्मिक गतिविधियों के अलावा ढाबे, खोमचे, पंप स्टेशन, झुग्गी झोपड़ियां और कुछ अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी शामिल हैं। कुछ जगहों पर वन भूमि पर बकायदा खेती की जा रही थी। ऐसे मामलों में भी वन भूमि को मुक्त कराया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में 27 मंदिर, 200 मजारों को हटाया गया है। ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में स्थित वन भूमि पर बने दो गुरुद्वारों को नोटिस दिया गया है।
अतिक्रमण की बात छुपाई तो नपेगी अफसरों की गर्दन
इस बीच कुछ रेंज अधिकारियों की ओर से धार्मिक और अन्य अतिक्रमणों काे छुपाने की भी खबरें आई हैं। इस पर शासन ने सख्त रूख अपनाया है। डॉ. धकाते ने बताया इस संबंध में सभी सर्किलों और प्रभागीय कार्यालयों सहित रेंजों तक यह बात स्पष्ट रूप से पहुंचा दी गई है, यदि किसी ने भी अतिक्रमण से संबंधित सूचना छुपाई तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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15 दिन में नहीं हटाया अतिक्रमण तो होगा मुकदमा
नोडल अधिकारी डॉ. धकाते ने बताया कि वन विभाग की ओर से अतिक्रमण चिह्नित किए जाने के साथ ही संबंधित पक्ष को नोटिस भी भेजा रहा है, यदि उनकी ओर से 15 दिन के भीतर खुद अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई भी की जाएगी।