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जेटली के पिटारे से उत्तराखंड को क्या मिला?

Fri, 11 Jul 2014 11:24 AM IST
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
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वित्त मंत्री अरुण जेटली का बजट पिटारा उत्तराखंड के लिए थोड़ी मायूसी, थोड़ी राहत लेकर आया है। केदार आपदा के बाद पुनर्निर्माण की बाट जोह रहे राज्य को इस मद में निराशा हाथ लगी है, अलबत्ता केदारनाथ सुंदरीकरण के लिए धन की व्यवस्था से थोड़ी राहत मिलेगी।
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वन रैंक, वन पेंशन के लिए एक हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था पूर्व फौजियों की बहुलता वाले प्रदेश में राहत की खबर लेकर आया है। बजट प्रदेश की ग्रीन बोनस की मांग पर खामोश है।

अगर बजट को समग्रता से देखें तो इसके प्रावधान से मुल्क के दूसरे हिस्सों की तरह उत्तराखंड को भी फायदा होगा।

चरमराती पर्यटन व्यवस्था को नहीं मिला सहारा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय 2003 में प्रदेश को मिले औद्योगिक पैकेज की दोबारा शुरुआत की उम्मीद भी खत्म हो गई है।

उत्तराखंड के वाजपेयी सरकार की ओर से घोषित औद्योगिक पैकेज 2014 तक के लिए था लेकिन इसे 2010 में ही समाप्त कर दिया गया था लेकिन पैकेज की बदौलत प्रदेश में दस साल में पूंजी निवेश करीब 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा था।

पर्यटन के घोषित पांच सर्किट में उत्तराखंड को शामिल न किए जाने से मायूसी हाथ लगी है। आपदा से पर्यटन को करीब 25 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

लेकिन बजट से इसकी भरपाई नहीं हो पाई। बजट में जल विद्युत ऊर्जा का जिक्र नहीं है जो ऊर्जा प्रदेश के लिए एक झटका है।

लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्दोगों के लिए खुशखबरी

नई व्यवस्था के तहत लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्योगों के क्षेत्र में 10 हजार करोड़ रुपये के फंड से प्रदेश को जरूर फायदा हो सकता है। बल्ब उद्योग, रुड़की सर्वे उपकरण आदि को इससे सहारा मिलेगा।

देहरादून में डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल की स्थापना से प्रदेश में बैंकिंग सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी। इसके अलावा हिमालयी राज्यों के खास खेलों को बढ़ावा देने की घोषणा से भी उत्तराखंड के पर्यटन सेक्टर को राहत की संभावना नजर आ रही है।

केदारनाथ में नदी के मुहाने और हरिद्वार में घाटों के सौंदर्यीकरण की घोषणा राहतभरी है। हिमालयी अध्ययन केंद्र से देहरादून की देश और दुनिया के मैप पर होगा। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना से 87 फीसदी असिंचित क्षेत्रों वाले पहाड़ में कुछ सहूलियतों की उम्मीद है।

इसी तरह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, योजना से पहाड़ी जिलों में तेजी से कम हो रहे लिंगानुपात पर अंकुश लगाने के लिए धन की व्यवस्था हो सकेगी।
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इन योजनाओं से होगा फायदा

सीमांत क्षेत्रों में रेलवे नेटवर्क के विकास के लिए अलग से बजट की व्यवस्था की गई है। इससे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए अलग से बजट की व्यवस्था भी हो सकेगी।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था करने से उत्तराखंड के स्टेट हाईवे के विस्तार के लिए धन की व्यवस्था हो सकेगी।

600 नए सामुदायिक रेडियो केंद्रों की स्थापना की घोषणा से भी उत्तराखंड को फायदा मिलेगा। आपदा प्रभवित क्षेत्रों में मंदाकिनी की आवाज, कुमाऊं वाणी जैसे रेडियो केंद्र सफल रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के तहत 100 करोड़ रुपये का नेशनल एडाप्शन फंड।
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