इसलिए राज्य सरकार पर्यावरणीय सेवाओं का मूल्यांकन किया। अध्ययन के जरिये 21 पर्यावरणीय सेवाओं का मूल्य निकाला। नियोजन विभाग के कराए गए अध्ययन के अनुसार, राज्य मे पर्यावरणीय सेवाओं की फ्लो वेल्यू 95 हजार करोड़ रुपये सालाना है, जो राज्य की जीडीपी का करीब 43 प्रतिशत है। वन क्षेत्र की स्टॉक वेल्यू करीब 15 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है, जो जीडीपी का साढ़े छह गुना है। इसमें टिंबर, कार्बन स्टोरेज व अन्य सेवाएं शामिल हैं। इन सबके बदले में केंद्र सरकार से राज्य सरकार ग्रीन बोनस के रूप में करीब सात हजार करोड़ की सालाना मांग कर रही है।
ग्रीन बोनस मिलने से होंगे ये फायदे
राज्य सरकार की अपेक्षा के अनुसार यदि केंद्र ग्रीन बोनस की मुराद पूरी करता है तो इसका बड़ा फायदा राज्य सरकार को नई योजनाओं को शुरू करने में मिलेगा। यह ऐसी धनराशि होगी, जिसे वह अपनी इच्छा से खर्च कर सकेगी। चुनावी साल में उसे नई योजनाओं को शुरू कर अपने पक्ष में माहौल बनाने में भी मदद मिल सकेगी।
हम केंद्र सरकार से आशा कर रहे हैं कि हमें ग्रीन बोनस के एवज में धनराशि मिलेगी। ग्रीन एकाउंटिंग के एक अध्ययन के अनुसार, उत्तराखंड प्रतिवर्ष 95 हजार करोड़ रुपये की पर्यावरणीय सेवाए दे रहा है। लेकिन इसके एवज में उसे विकास को सीमित करने की कीमत चुकानी पड़ रही है।
- मदन कौशिक, शासकीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री उत्तराखंड सरकार