कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन से पर्यटन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। करीब 12 हजार करोड़ कारोबार की चारधाम यात्रा का ही संचालन ठीक से नहीं हो पाया। पर्यटन विकास के लिए इस बार 15वें वित्त आयोग से सरकार को करीब आठ हजार करोड़ रुपये भी मिले हैं। ऐसे में बजट में सरकार से इस बार पर्यटन क्षेत्र में नई घोषणाओं की भी उम्मीद की जा रही है।
टिहरी झील को आधार बनाकर स्वदेश दर्शन योजना के तहत इस समय काम किया भी जा रहा है। साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से नए टूरिस्ट सर्किट को विकसित करने का इरादा भी जताया जा सकता है। इसके साथ ही इको टूरिज्म पर अभी तक प्रदेश सरकार सही तरीके से काम नहीं कर पाई है। बजट में होम स्टे योजना को खासी सहायता की उम्मीद है।
पर्यटन नीति घोषित होने के बाद भी पर्यटन का जीडीपी में योगदान और पर्यटन का बजट अधिक नहीं बढ़ा है। वर्ष 2018-19 में पर्यटन का बजट कुल बजट का मात्र 0.33 प्रतिशत था। इसी तरह जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र का योगदान मात्र 0.06 प्रतिशत ही पाया गया था। इसका कारण यह भी था कि प्रदेश सरकार की ओर से पर्यटन सर्किट के विकास से लेकर अधिकतर योजनाओं में केंद्र का ही सहारा लिया गया।
बागवानी : बढ़ाना होगा 2.93 लाख हेक्टयर क्षेत्र का दायरा
हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर बागवानी और जड़ी बूटी के उत्पादन में प्रदेश में संभावनाओं से सरकार इनकार नहीं कर रही है। इस समय प्रदेश में करीब 2.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी हो रही है। इसमें से 17.55 लाख मीट्रिक टन उत्पादन किया जा रहा है। इसमें फलों का उत्पादन 6.64 लाख मीट्रिक टन ही है।
सहकारिता के तहत प्रदेश सरकार की ओर से सेब उत्पादकों की शीर्ष संस्था का गठन किया जा चुका है। बजट में इस क्षेत्र को अब और अधिक सहारे की दरकार है। सेब के साथ ही स्थानीय अन्य फलों के उत्पादन को बढ़ाना और इन फलों के लिए बाजार उपलब्ध कराने के लिए बजट में अधिक मदद की उम्मीद की जा रही है।
प्रदेश में मात्र 1562 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। कोल्ड चेन स्थापित करने के लिए सरकार इस बार बजट में प्रावधान कर सकती है।
राजधानी देहरादून को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन सरकार से अब अन्य शहरों और कस्बों के विकास की भी उम्मीद की जा रही है। 2001 की जनगणना में प्रदेश में कुल 83 जनगणना शहर थे। 2011 में इनकी संख्या बढ़कर 86 हो गई। शहरी क्षेत्र की जनसंख्या करीब चार प्रतिशत की दर से बढ़ रही है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह दर करीब एक प्रतिशत है।
ऐसे में शहरों को अधिक बिजली, पानी, सीवर, रोजगार की जरूरत है। प्रदेश सरकार अभी उत्तरांचल शहरी स्थानीय निकाय सुधार योजना, अटल नवीनीकरण आदि योजनाओं के जरिए इस काम को कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक बजट की व्यवस्था करेगी।
परिवहन एवं संचार : आपदा प्रबंधन से लेकर यातायात तक का दबाव
ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना से सरकार इस मोर्चे पर राहत में है। इतना होने पर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़क संयोजकता को लेकर सरकार दबाव में है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का विस्तार प्रदेश में करने के लिए सरकार की ओर से कोशिश की जा रही है। बजट में राज्य सेक्टर की सड़कों को अपग्रेड करने और सभी बसावटों को सड़क मार्ग से जोड़ने, नए पर्यटक स्थलों को सड़कों से जोड़ने, रोपवे, बस बेड़े को बढ़ाने के लिए अधिक बजट की उम्मीद सरकार से की जा रही है।
रोजगार और सेवायोजन: चुनावी वर्ष में रोजगार की दरकार
प्रदेश में करीब आठ लाख पंजीकृत बेरोजगार हैं। चुनावी वर्ष में हर हाथ को काम देने का भी सरकार पर दबाव है। कैंपा के जरिये दस हजार युवाओं को ग्राम प्रहरी बनाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना आदि पर भी सरकार काम कर रही है।
रोजगार का मुद्दा विपक्ष भी तीखे तरीके से उठा रहा है। सरकार स्वरोजगार पर इस समय फोकस भी कर रही है। ऐसे में बजट से स्वरोजगार योजनाओं के लिए अधिक धन की व्यवस्था की जा सकती है। इस क्षेत्र में सरकार से नई योजना लाने की उम्मीद भी की जा रही है।
वन्य जीवों से फसल संरक्षण, पलायन की रोकथाम
वन्यजीवों से फसलों को बचाने के लिए सरकार की ओर से कैंपा के तहत नए बंदरबाड़े बनाने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। बजट में सरकार से इस योजना को आगे बढ़ाने की भी उम्मीद की जा रही है। इसके साथ ही मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए भी सरकार के स्तर से अधिक बजट की व्यवस्था करने की उम्मीद की जा रही है।