केंद्रीय बजट का पूरा फायदा लेने के लिए उत्तराखंड सरकार को अपने स्तर पर मेहनत करनी होगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में ग्राम्य विकास पर फोकस किया है पर इसका पूरा फायदा लेने के लिए उत्तराखंड को अपने स्तर से इस क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का निदान भी करना होगा।
मुसीबत दूसरी भी है। केंद्रीय कर अंतरण (टैक्स में राज्य का हिस्सा) में राज्य को एक हजार करोड़ रुपये पहले की तुलना में अधिक मिल रहे है। इसके उलट पूर्व में मिल रही विशेष योजना सहायताओं में कटौती से राज्य को करीब 2500 करोड़ का नुकसान हो रहा है। ऐसे में करीब 1500 करोड़ रुपये का कुल नुकसान है जिसकी भरपाई राज्य सरकार को अपने स्तर पर करनी होगी।
विशेषज्ञों की माने तो बजट विकासपरक और मांग को बढ़ाने वाला है। ग्रामीण क्षेत्र पर फोकस है। इसका उत्तराखंड को फायदा मिलेगा। इसके उलट तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। प्रदेश में 95 प्रतिशत सीमांत किसान हैं। बमुश्किल पांच प्रतिशत ही बड़े किसान हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन एक बड़ी समस्या है। यही हाल उद्योगों का भी है।
ग्राम्य विकास के लिए जेटली के बजट में ग्राम पंचायतों और नगर निकायों को दी जा रही है बजट सहायता पर भरोसा किया गया है। यह भी पंचायतों और नगर निकायों के प्रदर्शन के ऊपर निर्भर करेगा। इसमें भी अगर राज्य सरकार की भूमिका सकारात्मक रही तो ही इस बजट का फायदा प्रदेश को मिलेगा।
पर्यटन को लेकर पूर्व में नए सर्किट भी केंद्र सरकार घोषित करती रही है। इस बार पर्यटन को इस तरह का कोई इन्सेंटिव नहीं मिल पाया है। प्रदेश सरकार पर्यटन को ही प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ भी मानती रही है।
प्रदेश को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ग्रीन बोनस की मांग की थी। विशेषज्ञों की माने तो कृषि में निवेश बढ़ाने के लिए बढ़ाया गया सेवा कर प्रदेश को नुकसान ही पहुंचाएगा। प्रदेश में सेवा क्षेत्र ही सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। सेवा क्षेत्र के लिए सेवा कर में वृद्धि में डिटरेंट का काम भी कर सकती है।
मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए बजट में बाजार में मांग बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है, जो सही भी है। बजट में ग्रामीण क्षेत्र में निवेश पर जोर का फायदा उत्तराखंड को भी मिलेगा। इतना जरूर है कि राज्य की बहुत सारी समस्याएं हैं, जिनके समाधान के लिए केंद्र से सहयोग जरूरी है। यह इस बजट में नहीं मिल पाया है। -इंदु कुमार पांडे, सलाहकार, मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्य सचिव।
उत्तराखंड के विशेष राज्य के दर्जे पर मुहर
केंद्रीय बजट से कम से कम इतना जरूर साफ हो गया है कि उत्तराखंड का विशेष राज्य का दर्जा बरकरार है। केंद्र के 2016-17 के योजना बजट में 25 योजनाओं में राज्य को 90:10 का अनुपात मिलेगा।
इसके अलावा सीमा क्षेत्र विकास, राष्ट्रीय नदी संरक्षण और ग्रामीण-शहरी मिशन में राज्य को 80:20 का अनुपात मिलेगा। इसका मतलब यह भी हुआ कि इन योजनाओं के कुल खर्च में राज्य को 20 प्रतिशत अपनी तरफ से खर्च करना होगा।
प्रदेश के विशेष राज्य के दर्जे के लिए मुख्यमंत्रियों के समूह की सिफारिशों को केंद्र सरकार ने पहले ही स्वीकार कर लिया था।
प्रदेश के लिए राहत की बात यह है कि इस बार के केंद्रीय बजट में 2016-17 के योजना बजट में इसका प्रावधान कर दिया गया है। बजट में मुख्य योजनाओं में प्रमुख रूप में मनरेगा, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, अनुसूचित जातियों, जन जातियों, पिछड़े और अन्य संवेदनशील वर्गों, अल्पसंख्यकों के विकास के लिए अंब्रेला कार्यक्रम में कुल 56186.65 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। ये सभी कार्यक्रम पूरी तरह से केंद्र पोषित होंगे।
इसी तरह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना, श्वेत क्रांति, नीली क्रांति, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण जलापूर्ति स्वच्छ भारत अभियान, राष्ट्रीय स्वास्थ्य, राष्ट्रीय शिक्षा, प्रधानमंत्री आवास, आजीविका मिशन, अमृत और स्मार्ट सिटी, संसद सदस्य स्थानीय विकास क्षेत्र विकास, पुलिस बलों के आधुनिकीकरण सहित 25 योजनाओं में प्रदेश को 90:10 अनुपात का फायदा मिलेगा।
केंद्र के योजना बजट में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यह अनुपात तीन हिमालयी राज्यों और आठ उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए हैं। 90:10 की योजना वाले कार्यक्रमों के लिए 168992.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
बजट में हालांकि ग्रीन बोनस पर केंद्र ने तस्वीर साफ नहीं की है। राज्य के लिए किसी विशेष योजना सहायता का जिक्र न होना भी प्रदेश को अखर सकता है। सरकारी कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के लागू होने का भी इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में आयकर की सीमा में इजाफा न होना इनके साथ ही नौकरी पेशा वर्ग को भी अखर रहा है।
सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को पांच लाख तक की आय पर पांच हजार रुपये तक की छूट में भी फायदा दिख रहा है। राज्यों के रोजगार कार्यालयों को राष्ट्रीय करियर सेवा से जोड़ने, भू-प्रबंधन को कंप्यूटरीकरण करने की योजना को नए सिरे से केंद्र पोषित करने, मुद्रा योजना में विस्तार, राज्यों और जिलों को जोड़ने के लिए शुरू की गई एक भारत, श्रेष्ठ भारत योजना का लाभ भी प्रदेश को मिलेगा।
बजट से चारधाम मार्ग के लिए होगी आसानी
केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का बजट बढ़ने से चारधाम मार्ग के निर्माण कार्य के और सुगम होने की उम्मीद बढ़ गई है।पिछले साल की तुलना में इस बार मंत्रालय को 10,869 करोड़ रुपये अधिक बजट का प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के हिस्से में जो बजट आएगा उससे चारधाम की राह और आसान हो जाएगी। चारधाम मार्ग और इससे जुड़ने वाले मार्गों के निर्माण की परियोजना के लिए 12 हजार करोड़ की जरूरत है।
यह परियोजना चार साल की है। अगर साल तीन हजार करोड़ हर साल मिल जाता है तो चारधाम योजना तेजी से परवान चढ़ जाएगी। पिछले बजट में मंत्रालय को 47,107 करोड़ रुपये बजट मिला था। इस साल इसे बढ़ाकर 57,976 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
केंद्रीय बजट में उत्तराखंड के लिए सकारात्मक नजरिया नहीं है। अनुसूचित जाति, जनजाति की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तियों के मद में एक अरब 49 करोड़ रुपये बाकी है, प्री मैट्रिक का 15 करोड़ रुपये बाकी है। प्रदेश के सांसदों की पैरवी कमजोर पड़ रही है। इसी वजह से जनकल्याण की योजनाओं के लिए कुछ मिल नहीं पा रहा है।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, मंत्री समाज कल्याण
बजट निराशा जनक है। उत्तराखंड को केंद्रीय बजट से कुछ नहीं मिला। प्रदेश को विशेष पैकेज नहीं दिया गया। बेरोजगारों के लिए भी कुछ नहीं किया गया।
- विनोद बड़थ्वाल, वरिष्ठ सपा नेता, सलाहकार यूपी सरकार
अल्पसंख्यकों के लिए कोई नई योजना शुरू नहीं की गई है। केंद्रीय बजट में किसी नए क्षेत्र के लिए प्रावधान नहीं किया गया। पुरानी योजनाओं में भी बजट दिया गया है। उत्तराखंड के लिए अल्पसंख्यकों के लिए अलग से कुछ नहीं है।
- आरए खान, सदस्य प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम समिति