उत्तराखंड की कांग्रेस गठबंधन सरकार में शामिल बसपा अपने खाते का मंत्री पद भूल गई है। गठबंधन के समय बसपा के खाते में कैबिनेट मंत्री का एक पद आया था लेकिन बाद में पार्टी ऐसी बिखरी कि अब प्रदेश नेतृत्व इसे लेकर गंभीर नहीं है।
2012 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए सहयोग की जरूरत हुई तो बसपा आगे आई थी। तब बसपा के पास तीन विधायक थे। दबाव की राजनीति में मात्र तीन विधायक होते हुए भी बसपा के हिस्से कैबिनेट मंत्री का एक पद आ गया था। बसपा कोटे से भगवानपुर के विधायक सुरेंद्र राकेश मंत्री बने थे।
समीकरण ऐसे बदले कि पार्टी ने सुरेंद्र राकेश के साथ ही झबरेड़ा विधायक हरिदास को निलंबित कर दिया। तब चर्चा चली थी कि निलंबित होने के बाद सुरेंद्र राकेश की कुर्सी जा सकती है।
बीच-बीच में बसपा के कुछ पदाधिकारियों ने दबे स्वरों में यह मांग भी उठाई लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इसे अनसुना कर दिया। बाद में सुरेंद्र राकेश की मृत्यु हो गई और उनकी पत्नी ममता राकेश कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंची।
तब पार्टी के अंदर जोर-शोर से यह मांग उठी थी कि एक मंत्री पद बसपा कोटे का है, लिहाजा पार्टी के एकमात्र विधायक सरवत करीम अंसारी को कैबिनेट में जगह मिलनी चाहिए। हरीश रावत कैबिनेट में अभी तक एक पद खाली चला आ रहा है लेकिन बसपा की मांग घर के अंदर ही दम तोड़ चुकी है।
जब कांग्रेस के साथ गठबंधन हुआ तब बसपा उनकी मजबूरी थी। उपचुनावों के बाद अब कांग्रेस को पूरा बहुमत मिल चुका है। अब उन्हें हमारी जरूरत कहां है। मंत्री पद अब मुद्दा नहीं है। अब तो जैसा चल रहा है ठीक है।
- सतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष बसपा उत्तराखंड