गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार गंगा किनारे स्थित उत्तराखंड समेत देश के पांच राज्यों में जलीय जंतुओं का ब्रीडिंग सेंटर खोलेगी। इन जलीय जंतुओं को गंगा में छोड़ा जाता रहेगा। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के प्रबंध निदेशक रजत भार्गव ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि गंगाजल को शुद्ध बनाने के लिए जलीय जंतुओं का सहारा लिया जाएगा। प्रबंध निदेशक ने बताया कि इसके लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वार्ता हो चुकी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कछुओं के ब्रीडिंग सेंटर के लिए ऋषिकेश में 500 एकड़ जमीन देने का वादा किया है। इसके अलावा इन पांच राज्यों में गंगा किनारे कुल 400 शवदाह गृहों का भी निर्माण किया जाएगा।
नमामि गंगे परियोजना के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल होने आए रजत ने बताया कि सिर्फ केमिकल युक्त पानी रोक देने से गंगा जल शुद्ध नहीं होगा। इसके लिए मछलियों, कछुओं, घड़ियाल जैसे जलीय जंतुओं की संख्या भी गंगा में बढ़ानी पड़ेगी। इन जंतुओं में पानी को कुदरती रूप से साफ करने की क्षमता होती है।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में जहां-जहां गंगा हैं, उनके किनारे वाले शहरों में ब्रीडिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मिशन फॉर क्लीन गंगा ने गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के शुरुआती अभियान के लिए सौ दिन की प्लानिंग तैयार की है। इस प्लानिंग के तहत जो काम शुरू होंगे उससे डेढ़ साल के अंदर कुछ काम दिखने लगेगा। हर राज्य की सरकारों ने इस अभियान में सहयोग देने के लिए एक एक कैबिनेट स्तर के मंत्रियों को इससे जोड़ने की बात कही है।