उत्तराखंड में छात्राओं ‘लाडो’ को नवीं कक्षा में प्रवेश पर मिलने वाली साइकिल में बजट का ब्रेक लग गया है। सरकार ने छात्राओं को साइकिल देने की घोषणा तो की, लेकिन बजट का प्रावधान करना भूल गई।
बीते पांच साल में अब तक केवल एक बार ही इस मद में नाममात्र का बजट जारी हुआ। इसके चलते सभी छात्राओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका। वहीं इस वर्ष बजट मद में एक रुपया भी जारी नहीं हो सका है।
छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने 2012 में बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना की शुरुआत की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने 18 अगस्त 2012 को योजना की घोषणा की। योजना के तहत कक्षा नौ में प्रवेश लेने वाली मैदानी क्षेत्र की छात्राओं को साइकिल और पहाड़ी क्षेत्र की छात्राओं को साइकिल की कीमत की एफडी दी जानी थी।
सरकार ने योजना तो शुरू कर दी, लेकिन इसके लिए बजट का प्रावधान नहीं किया। 2012 से 2015 तक इस मद में विभाग को पैसा नहीं मिला। इसके चलते बड़ी संख्या में छात्राएं लाभ वंचित रहीं। 2016 में पहली बार करीब चार करोड़ की धनराशि जारी हुई। जबकि विभाग को करीब 60 हजार छात्राओं के लिए 18 करोड़ रुपये की जरूरत थी।
ऐसे में विभाग ने केवल एससी और एसटी वर्ग की छात्राओं को ही लाभान्वित कर सका। इस वर्ष भी विभाग ने 18 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव बनाकर भेजा है, लेकिन अभीतक कुछ नहीं मिल पाया है।
चार वर्ष की बननी थी एफडी
योजना के तहत पहाड़ी क्षेत्रों की छात्राओं को चार साल के लिए साइकिल की कीमत की बराबर धनराशि की एफडी मिलनी थी। चार साल बाद 12वीं पास करने के बाद वह एफडी का पैसा निकाल सकती थीं, लेकिन बजट जारी न होने के चलते उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया।
इस वर्ष करीब 62 हजार छात्राएं
योजना के तहत इस वर्ष प्रदेश की करीब 62 हजार छात्राओं को लाभ दिया जाना है। योजना के तहत सभी वर्गों की छात्राओं को लाभ देने का प्रावधान है। स्कूलों और जिलों ने अपनी-अपनी सूची तैयार कर निदेशालय को भेज दी है। विभागीय अधिकारी बजट का इंतजार कर रहे हैं।
योजना के लिए बजट नहीं मिल पाया है। इस वर्ष हमने करीब 62 हजार छात्राओं के लिए 18 करोड़ से अधिक का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि अभी तक कोई पैसा योजना के तहत नहीं मिला है। बजट मिलने पर ही छात्राओं को लाभ दिया जा सकेगा।
- आरके कुंवर, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा