उत्तराखंड में जिला स्तरीय उद्योग मित्र समिति की स्थापना हुई तो इसलिए थी ताकि जिले में उद्योगों के विकास को रफ्तार मिल सके, लेकिन हो इसका ठीक उलटा रहा है।
निर्णयों पर भी काम नहीं हुआ
महीनों बाद भी एक तो बैठक नहीं हुई, ऊपर से पूर्व में हुई बैठक में लिए निर्णयों पर भी काम नहीं हुआ। न तो इंडस्ट्रियल एरिया में सड़कें ठीक हो पाईं और न ही एटीएम लग सके।
आलम यह है कि जून में आपदा के वक्त बह गई सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया की 122 एमआई की सड़क अब तक नहीं बन सकी।
इस पर पैचवर्कही हुआ है। न तो नालियां बन सकी हैं और न ही रिटेनिंग वाल। कम्युनिटी सेंटर, डिस्पेंसरी अपग्रेडेशन की दिक्कतें ज्यों की त्यों बनी है।
समिति की बैठक के संबंध में जो नियम बनाए गए हैं, उनकेमुताबिक देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल में हर महीने एक बार बैठक की जानी है, जबकि अन्य जिलों में दो माह में एक बार।
नियम हवा में
लेकिन राजधानी में ही यह नियम हवा में है। पिछली बैठक 28 अक्तूबर को आयोजित की गई थी, जिसमें 17 बिंदु उठाए गए थे।
लेकिन इनमें से 10 हैंड पंपों की स्थापना और मोहब्बेवाला में सड़क मरम्मत को छोड़ कुछ नहीं हुआ। ज्यादातर को सिडकुल से संबंधित होने के चलते सिडकुल को रैफर कर दिया गया।
इस बीच 15 नवंबर को सीडीओ के साथ अफसरों ने सेलाकुई का दौरा किया, समस्याओं को दूर करने की बात कही, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
इसके बाद उद्योगपतियों की बीती सात दिसंबर को सिडकुल के अधिकारियों के साथ भी बैठक हुई, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही निकला।
पहले पुराने क्षेत्रों की दिक्कतें तो दूर करें
जिला स्तरीय उद्योग मित्र समिति की बैठक में जिले में दो नए औद्योगिक क्षेत्र चिन्हित करने का मसला उठ चुका है। इस संबंध में चार माह में केवल नक्शा ही टाउन प्लानर तक जा सका है।
इस प्रस्ताव का परीक्षण अर्बन प्लानिंग एंड प्रापर्टी डेवलपमेंट गुड़गांव (हरियाणा) को करना है, लेकिन यह कछुआ चाल रहा है। वहीं स्थानीय उद्योगपतियों का कहना है कि दो नए औद्योगिक क्षेत्रों पर काम तो तब किया जाए, जब वर्तमान पूरी तरह विकसित हो जाएं। यहां की दिक्कतें तो दूर हो नहीं पा रही। दो नए और कैसे संभलेंगे।
हां, हर महीने बैठक जरूरी है, पर नहीं करा सके हैं। क्योंकि बहुत काम था। जल्दी ही इसका आयोजन करेंगे।
- कौशल्या बंधु, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र
औद्योगिक क्षेत्रों का बुरा हाल है। सड़क, स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं तक ठीक से मुहैया नहीं। कमाऊ पूत तक को तवज्जो नहीं दी जा रही। ऐसे में बैठक ही नहीं होगी तो समीक्षा कैसे हो पाएगी? यूं भी बैठकों में उठाए गए बिंदुओं पर काम अब तो हुआ ही नहीं।
- पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड