अस्पताल में जन्म के बाद नौनिहालों को अभी सरकारी सवारी नहीं मिल सकेगी। नई व्यवस्था में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 तो जैसे-तैसे संचालित हो गई, लेकिन खुशियों की सवारी के चलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सीएमओ स्तर पर संचालन को दी गई सेवा के लिए अभी चालकों की भर्ती भी नहीं हो सकी है। साथ ही दरों कोे लेकर भी कई विवाद चल रहे हैं। ऐसे में निदेशालय की ओर से एक बार इस बात को शासन के संज्ञान में लाया जाएगा।
बीते मार्च तक एंबुलेंस 108 और खुशियों की सवारी का संचालक जीवीके कंपनी करती थी। प्रदेश में खुशियों की सवारी में 95 वाहन संचालित होते थे, लेकिन इस बार इन दोनों सेवाओं को जीवीके से ले लिया गया। एंबुलेंस 108 के संचालन का काम निविदा के आधार पर कैंप कंपनी को दे दिया गया, लेकिन खुशियों की सवारी के वाहन अभी खड़े हैं।
अप्रैल में शासन ने खुशियों की सवारी को सीएमओ को संचालित करने के लिए कहा था। इसके बाद सीएमओ स्तर पर इसके लिए टेंडर आदि किए जाने थे। देहरादून के सीएमओ डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि सेवा का संचालन करने में काफी परेशानियां सामने आ रही हैं। सेवा के लिए अभी चालकों की भर्ती भी नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही ठेकेदारों ने विभाग की दरों को बेहद कम बताया है। लिहाजा, अब दोबारा से इस सेवा के संचालन के लिए शासन से ही वार्ता की जाएगी।
प्राइवेट वाहन से ही लाने को मजबूर
लोग प्रसूता और नौनिहालों को प्राइवेट वाहन से ही घर ले जाने को मजबूर हैं। अस्पतालों में इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। यह सुविधा शुरू न होने से लोगों को खासी परेशानी हो रही है।
विभाग इस मामले पर ध्यान दे रहा है। सीएमओ ने इस बारे में जानकारी दी है कि सेवा के संचालन में परेशानियां आ रही हैं। शासन से भी शीघ्र बात की जाएगी, ताकि इसे जल्द शुरू किया जा सके।
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डॉ. रविंद्र थपलियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक