पुलिस के मुताबिक, मकान चंद्रबनी निवासी रमेश चतुर्वेदी का है। साल 2014 से वह अपने परिवार के साथ इस मकान में रह रहे थे। उस घर के निचले हिस्से में फॉम के गद्दे बनाने का काम होता है। इस काम में रोहताश, बॉबी और गुड्डू उसकी मदद करते है।
मंगलवार को पित्थुवाला निवासी राजमिस्त्री पप्पू उसके यहां काम कर रहा था। इस दौरान पप्पू का बेटा राहुल दोपहर में उसे खाना देने वहां आया था। वह पंखे के नीचे लेटकर आराम कर रहा था, लेकिन इस दौरान वहां शॉर्ट सर्किट से आग लग गई।
इतना वह वहां से निकल पाता आग तेज भड़क चुकी थी। फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर युवक को बाहर निकाला, लेकिन वह झुलस चुका था। वहीं इलाज के दौरान डॉक्टरों ने भी उसे मृत घोषित कर दिया।
आग की लपटों के बीच फंसे राहुल ने खुद को बचाने की भरसक कोशिश की थी, लेकिन धुएं का गुब्बार उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गया। किशोर गोदाम के अंदर से निकलने वाले रास्तों से भी पूरी तरह परिचित नहीं था। प्रथम दृष्टया किशोर की मौत की वजह धुएं से दम घुटना ही बताई जा रही है। हालांकि मौत की सही वजह बुधवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चल पाएगी।
पटेलनगर के चंद्रबनी निवासी व्यापारी रमेश चतुर्वेदी के गद्दे के गोदाम में मंगलवार को आग इतनी तेजी से फैली कि कोई कुछ नहीं कर पाया। अफरातफरी में हर कोई जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागा। जब तक अंदर फंसे राहुल की कर्मचारियों और उसके पिता को याद आई तब तक काफी देर हो चुकी थी। दरअसल, शार्ट सर्किट से निकली चिंगारी से आग गोदाम के बाहरी हिस्से में लगी थी। जिसकी वजह से अंदर से बाहर और बाहर से अंदर जाना बेहद मुश्किल था। आग के साथ धुएं के गुब्बार ने पूरे गोदाम को अपनी आगोश में लिया हुआ था।
अंदर फंसा राहुल पहली बार गोदाम के अंदर गया था। वह गोदाम की पूरी स्थिति से परिचित नहीं था। प्रत्यक्षदर्शियाें के मुताबिक एक बार राहुल की चीख की आवाज सुनाई दी थी। निसंदेह वह बचने को इधर से उधर जरूर दौड़ा होगा, लेकिन धुआं उसकी सांसों पर भारी पड़ता चला गया। आईएसबीटी चौकी प्रभारी सचिन पुंडीर ने बताया कि जिस समय राहुल को गोदाम के अंदर से बाहर निकाला गया था, उसकी सांसे चल रही थी।
शरीर का कोई हिस्सा भी नहीं जला था। बेटे की मौत से पिता पप्पू बदहवास हालत में है। पिता का कहना था कि भोजन देकर घर चला जाता तो उसके लाडले की जिंदगी बच जाती है। वो उस समय को कोस रहे थे, जब बेटा गोदाम के अंदर गर्मी से बचने के लिए चला गया था।
...तो हो सकती थी बड़ी अनहोनी
गनीमत रही कि व्यापारी रमेश चतुर्वेदी का परिवार इस दौरान मौजूद नहीं था, अन्यथा बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। गोदाम के ऊपरी हिस्से में चतुर्वेदी का परिवार रहता है। गोदाम से निकली आग की लपटों ने पहली मंजिल पर रखे सामान को भी पूरी तरह जला दिया है।
बड़े बेटे की मौत से परिवार में कोहराम
जमिस्त्री पप्पू के परिवार में बडे़ बेटे राहुल की मौत से कोहराम मचा हुआ है। पप्पू के तीन बेटे और एक बेटी है। राहुल इनमें सबसे बड़ा था। पास में काम करने के कारण राहुल अपने पिता के लिए दोपहर का भोजन लेकर गोदाम पहुंचा था। शायद होनी का यही मंजूर था।