आरटीआई से सूचना मांगने के बाद 10 अगस्त को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, लेकिन दोबारा जांच पहले वाले एसआई को सौंप दी, जबकि वे पहले ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर रिपोर्ट दे चुके थे कि जांच अपेक्षित नहीं है।
ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती। पीड़िता ने केस में अब तक पांच जांच अधिकारी बदलने पर हैरानी जताई है और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। हाईकोर्ट ने पूर्व में अपने एक आदेश में याची को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक महिला मानने को कहा है। पीड़िता के अनुसार इस मामले में कोटद्वार निवासी एक युवक ने पुलिस में तहरीर दी कि आरोपी ने उनका मोबाइल छीनकर पीड़ित को फोन पर धमकाया।