फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मौत से पहले अपनी इन तीन इच्छाओं को पूरा करना चाहते थे टॉम अल्टर

Sun, 01 Oct 2017 06:09 PM IST
अजय रमोला/अमर उजाला, मसूरी
विज्ञापन
विज्ञापन
दिवंगत सिने अभिनेता टॉम आल्टर ने अपने आखिरी पलों में जो इच्छाएं जाहिर की अब वे हमेशा के लिए अधूरी रह गई। अपने बेटे और पत्नी से वे हमेशा इन इच्छाओं का जिक्र किया करते थे। आप भी जानिए...
विज्ञापन


टॉम अल्टर अपने आखिरी दिन अपनी जन्म भूमि मसूरी में बिताना चाहते थे। आखिरी समय में उस मिट्टी में दफन होने की उसकी चाहत भी अधूरी रह गई, जहां खेलकर वह बड़ा हुआ। जहां से संघर्ष का ककहरा सीखकर उसने देश-दुनिया में नाम कमाया। जिंदगी का आखिरी समय मसूरी में गुजारकर यहां की मिट्टी को चूमने की टॉम आल्टर की ख्वाहिश अब कभी पूरी नहीं हो सकेगी।

ख्याति प्राप्त सिने अभिनेता, पत्रकार, नाटककार, लेखक और खेल प्रेमी पद्मश्री टॉम आल्टर के निधन का समाचार सुनकर पहाड़ों की रानी मसूरी पूरी तरह शोक में डूब गई। हर किसी की जुबान पर उनका ही नाम आ रहा था। बाजार हो या घर, चाय का स्टाल हो या पान की दुकान, कार्यालय हो या राह चलते लोग, यहां तक कि सोशल मीडिया हो या अन्य कोई साधन सभी में टॉम आल्टर की मौत पर शोक व्यक्त किया जा रहा है।
विज्ञापन


टॉम ने शुक्रवार रात साढे़ नौ बजे मुंबई के सैफी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उस समय उनका बेटा जेमी ऑल्टर, पत्नी और अन्य परिजन अस्पताल में मौजूद रहे। उनका पूरा परिवार मसूरी में रहता है। वह हर छोटे-बड़े आयोजन के लिए मसूरी आते और शिद्दत से भागीदारी करते। वह कुछ समय पहले तक भी दौड़ में हिस्सा लेते थे। मसूरी में होने वाले ऑटम फेस्टिवल और विंटर लाइन कार्निवाल के लिए वह हमेशा मसूरी आते और बिना कोई मेहनताना लिए अपनी प्रस्तुति देते।

रानीखेत की शांत आबोहवा में रहना था

Tom Alter - फोटो : Tom Alter
टॉम बीमारी के दौरान भी वह कुछ पल रानीखेत की शांत आबोहवा में बिताना चाह रहे थे, लेकिन यह ख्वाहिश उनकी अधूरी ही रह गई। उन्होंने रानीखेत में 2002 में भारत भाग्य विधाता और 2006 में बाल फिल्म फोटो की शूटिंग की थी। टेनिस, क्रिकेट और लेखन कार्य उनकी दिनचर्या में शामिल था। रानीखेत में जब भी वह आते अपने मित्र होम फार्म निवासी हिमांशु उपाध्याय के साथ टेनिस खेला करते थे।

सिने अभिनेता टॉम आल्टर को रानीखेत की शांत वादियां खूब भाती थीं। वह पिछले 20 सालों से यहां आते रहते थे। उनके मित्र होम फार्म निवासी हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि टॉम यहां नियमित रूप से आते थे, टेनिस और क्रिकेट खेलना उनकी दिनचर्या में शामिल था। सुबह उठकर वह जंगल की सैर को निकलते थे। दो साल पूर्व उन्होंने रानीखेत में मौलाना शीर्षक से एक थिएटर भी किया था। बीमारी के दौरान वह कुछ पल रानीखेत की शांत आबोहवा में बिताना चाह रहे थे, दो अक्तूबर को उनका रानखेत आने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

उन्होंने बताया कि तड़के उठकर उन्हें लिखने का शौक था। उनको हिंदी और उर्दू भाषाओं का अच्छा ज्ञान था। मछलियों के आखेट को भी वह पसंद करते थे। उपाध्याय ने बताया कि शीघ्र ही उनकी बाल फिल्म फोटो को यहां प्रदर्शित किया जाएगा और रानीखेत के नागरिकों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की जाएगी।
विज्ञापन

गढ़वाली फिल्मों काम करना चाहते थे टॉम

प्रख्यात फिल्म अभिनेता पद्मश्री टॉम ऑल्टर के निधन के साथ ही उनकी आंचलिक फिल्मों में काम करने की हसरत भी अधूरी ही रह गई। टॉम गढ़वाली पर अच्छी पकड़ होने के चलते वह गढ़वाली फीचर फिल्मों में काम करना चाहते थे।

इसके लिए उन्हें सही अवसर की तलाश थी, मगर आंचलिक फिल्मकार उन्हें अभिनय का न्योता देकर इस अवसर को भुना नहीं सके। उनके निधन के साथ ही अब यह संभावना भी पूरी तरह से खत्म हो गई है।  

 इस दौरान अमर उजाला ने उनके फिल्मी भविष्य के साथ ही आंचलिक फिल्मों में काम करने की संभावनाओं पर बात की थी। तब टॉम का कहना था कि उत्तराखंड के मसूरी में ही बचपन बीता, इसी दौरान मैं अच्छे से गढ़वाली बोलना सीख गया था। आज भी मैं इस भाषा को भूला नहीं हूं।

आंचलिक फिल्मों में अवसर मिले तो निभाने को तैयार हूं। इससे मैं अपनी जन्मभूमि के प्रति अपनी निष्ठाओं को भी निभा सकूंगा। टॉम का कहना था कि कोई आंचलिक फिल्मकार गढ़वाली फिल्मों में अभिनय के लिए मुझे बुलाए तो मैं उसे स्वीकार करूंगा। बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ गढ़वाली गीतों की लाइनें भी गुनगुनाई थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें