हमारे बच्चे की मृत्यु, किसी और के जीवन का उजाला बन जाए : संदीप
नवजात के पिता संदीप राम ने कहा कि हमारे बच्चे को जन्म से ही आंतों की गंभीर बीमारी थी। तमाम प्रयासों के बावजूद हम उसे बचा नहीं पाए। यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा दुख है। जब संचित अरोड़ा ने हमें देहदान के बारे में बताया, तो हमने यही सोचा कि भले ही हमारा बच्चा इस दुनिया में न रह सका, लेकिन उसका शरीर किसी और बच्चे के जीवन की उम्मीद बन सकता है।
ये भी पढे़ं...Haridwar: मकर संक्रांति कल...पुण्य स्नान 15 जनवरी को भी, अब छह मास के लिए उत्तरायण हो जाएंगे सूर्य
यहां के छात्र बच्चे के शरीर के माध्यम से पढ़ाई व शोध कर अन्य मासूमों को नई जिंदगी देंगे। संदीप ने कहा कि इस कठिन निर्णय के पीछे केवल एक ही भावना थी कि हमारे बच्चे की मौत किसी और के जीवन की रोशनी बन जाए। यही सोचकर हमने अपने नवजात के शरीर को मेडिकल छात्रों के अध्ययन और मानव कल्याण के लिए समर्पित किया।