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बोर्डिंग स्कूल गैंगरेप: नामी स्कूल निकला फर्जी, जांच में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

Sun, 23 Sep 2018 09:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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cbse - फोटो : cbse
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छात्रा से गैंगरेप के बाद विवादों में आया देहरादून का नामी बोर्डिंग स्कूल पूरी तरह से फर्जी निकला। सूत्रों के मुताबिक, स्कूल ने फर्जी कागजों के आधार पर सीबीएसई से मान्यता ली।

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स्कूल को आठवीं तक की भी मान्यता नहीं है, जबकि यहां 12वीं तक की पढ़ाई कराई जा रही है। सोमवार को सीबीएसई की ओर से इस मामले में बड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

छात्रा से गैंगरेप प्रकरण सामने आने के बाद सीबीएसई देहरादून ने भाऊवाला स्थित बोर्डिंग स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

स्कूल के पास तो आठवीं की भी मान्यता नहीं

इसके बाद राज्य सरकार ने सीबीएसई दिल्ली से स्कूल की मान्यता खत्म करने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश के आधार पर सीबीएसई दिल्ली कार्यालय की ओर से स्कूल की जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक स्कूल के पास राज्य सरकार से कोई एनओसी नहीं थी। अब सीबीएसई ने और गहराई से पड़ताल की तो पता चला है कि स्कूल के पास तो आठवीं की भी मान्यता नहीं थी।

फर्जी कागजात लगाकर सीबीएसई से 12वीं की मान्यता ली गई है। सोमवार को सीबीएसई की ओर से स्कूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
 

स्कूल के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के निर्देश

सीबीएसई से मान्यता लेने के लिए सबसे पहले स्कूल को अपने सभी दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने होते हैं। इसके बाद सीबीएसई की ओर से निरीक्षण समिति गठित की जाती है।

यह समिति उन दस्तावेजों के आधार पर पूरी जांच पड़ताल करती है। इसके बाद सीबीएसई को अपनी रिपोर्ट देती है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही मान्यता दी जाती है। बोर्डिंग स्कूल ने फर्जी कागजात अपलोड करने के बाद मान्यता ले ली।

बिना एनओसी मान्यता लेने के प्रकरण का संज्ञान लेते हुए बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने एसएसपी को उस स्कूल के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि चूंकि स्कूल ने बिना दस्तावेजों के मान्यता ली है। जेजे (जुवेनाइल जस्टिस) एक्ट के तहत उस स्कूल के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया जाए।
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मुकदमे में जोड़ी गई धाराओं को न्यायालय ने स्वीकार किया

बोर्डिंग स्कूल में छात्रा से गैंगरेप प्रकरण के मुकदमे में जोड़ी गई धाराओं को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ  जबरन गर्भपात कराने और आरोपियों को छुपाने की धाराएं जोड़ी थी। इससे पहले न्यायालय ने आरोपियों पर लगाई गई आपराधिक षड्यंत्र और साक्ष्य छुपाने की धाराओं पर सवाल उठाए थे। अब इस मामले में आरोपियों की जमानत अर्जी पर 24 सितंबर को सुनवाई होनी है।

दरअसल 16 सितंबर को भाऊवाला बोर्डिंग स्कूल में छात्रा से गैंगरेप का मामला सामने आया था। पुलिस को जब इस बात का पता चला तो स्कूल के ही चार छात्रों की यह करतूत बताई गई। हालांकि इस मामले में बड़ी बात तब सामने आई जब पुलिस जांच में आया कि छात्रा से न सिर्फ  गैंगरेप हुआ बल्कि इसके बाद जब वह गर्भवती हुई तो उसके गर्भ को भी गिराने का प्रयास हुआ। पता चला कि गर्भपात के लिए उसे राजपुर स्थित एक नर्सिंगहोम में ले जाया गया था। वहां उसे दवाएं खिलाई गयीं। इस मामले में पुलिस ने गैंगरेप के आरोपी चारों छात्रों को हिरासत में लेने के साथ ही स्कूल प्रबंधन के निदेशक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। प्रबंधन के लोगों पर पुलिस ने साक्ष्य छुपाने और आपराधिक षड्यंत्र का केस बनाया। इन पांचों आरोपियों को जब स्पेशल पोक्सो कोर्ट में पेश किया गया तो न्यायालय ने इन पर लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाए।

चूंकि पुलिस उस वक्त तक न तो आपराधिक षड्यंत्र को स्थापित कर पा रही थी और न ही साक्ष्य छुपाने के आरोप को। ऐसे में आरोपियों का पक्ष भी मजबूत होता दिखा की उन्हें झूठा फंसाया गया है। हालांकि जब मेडिकल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि छात्रा का गर्भपात कराया गया है तो मुकदमे में गर्भपात कराने की धारा आईपीसी-313 भी जोड़ दी गई। इसके साथ ही आरोपियों को छुपाने की धारा आईपीसी 212 भी मुकदमे में जोड़ दी गयी। शनिवार को पुलिस ने न्यायालय में दोनों धाराओं के पक्ष में साक्ष्यों को अदालत में पेश किया तो न्यायालय ने इन्हें स्वीकार कर लिया। इसी के साथ आपराधिक षड्यंत्र आईपीसी की धारा-120 बी और साक्ष्य छुपाने की धारा-201 को भी न्यायालय ने स्वीकार कर ली है। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि दोनों धाराओं को साबित करने के लिए पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिए हैं। लिहाजा 24 सितंबर को आरोपियों की जमानत अर्जी का पूरे साक्ष्यों के साथ विरोध किया जाएगा।
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