उसने पीड़िता को यह कहते हुए चुप करा दिया कि उसी की गलती होगी, लिहाजा चुप रहो। इसके बाद उसने यह बात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी तनू गुप्ता को बताई। लेकिन, तनू गुप्ता ने उसे कहा कि स्कूल से निकाल दी जाओगी इसलिए चुप रहने में ही भलाई है।
बात प्रिंसिपल जितेंद्र शर्मा और फिर डायरेक्टर लता गुप्ता के पास भी गई। दोनों ने छात्रा को अपने पास बुलाया मगर उसकी मदद करने के बजाय छात्रा की ही गलती ठहरा दी। उन्होंने भी स्कूल से निकालने की धमकी दी। कुछ दिन बाद जब उसे मासिक धर्म नहीं हुआ तो उसने अपनी सहेलियों को यह बात बताई।
यहां से शुरू हुई अपराध को छुपाने की गंभीर साजिश। उसे हॉस्टल में ही गर्भपात कराने के लिए कुछ दवाएं खिलाई गईं। इसके बाद उसे राजपुर रोड स्थित एक डॉक्टर के पास भी ले जाया गया, जहां उसे गर्भपात के लिए दवाएं दिलाई गईं।
पीड़िता पर स्कूल के प्रबंधन के डर का आलम यह था कि वह अपने घर पहुंचकर भी अपने परिजनों को कुछ नहीं बता पाई थी। छात्रा घटना के बाद रक्षाबंधन के त्योहार पर अपने घर गई थी। बदनामी और स्कूल से निकाले जाने की धमकी का छात्रा पर इतना असर था कि वह उन्हें कुछ नहीं बता पाई।
वह परिजनों से लगभग रोज ही फोन पर बात करती थी। छात्रा 26 अगस्त 2018 को रक्षाबंधन पर भी घर गई थी, मगर वह वहां भी परिजनों को इसके बारे में कुछ नहीं बता सकी। सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता को घटना सामने आने के बाद भी सिस्टम की बेरुखी का सामना करना पड़ा था।
बोर्डिंग स्कूल से नाम हटवाने के बाद उसने एक स्थानीय स्कूल में ही प्रवेश के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। लेकिन, उस स्कूल ने भी उसे यह कहते हुए दुत्कार दिया था कि उसके आने से स्कूल का माहौल खराब हो जाएगा। इसकी शिकायत भी तत्कालीन एसएसपी से की गई थी, जिसके बाद स्कूल की जांच भी हुई।