सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रखी साधना
सेवानिवृत्ति के बाद भी जगूड़ी ने संगीत को नहीं छोड़ा। उन्होंने घर पर ही संगीत सिखाना शुरू किया। उनके पास शिष्य वहीं संगीत सीखने आते हैं। 80 वर्ष की उम्र में आज भी वह अपने शिष्यों को संगीत सिखा रहे हैं।
20 रुपये फीस में भी सिखाया
जगूड़ी के बेटे सुलभ ने बताया कि उन्होंने संगीत को व्यवसाय नहीं साधना बनाया। जब लोग पैसों के पीछे भागते थे, उन्होंने अपने शिष्यों से 20 रुपये तक भी फीस ली है। अगर शिष्य फीस देना चाहते भी हैं तो आज भी वह 400 या 500 रुपये ही फीस लेते हैं। जिनके अंदर सीखने का जुनून है उन्हें वह निशुल्क भी संगीत सिखाते हैं।
आवाज से पहचान लेते हैं अपने शिष्यों को
मुरलीधर जगूड़ी के शिष्य रहे गौतम थापा ने बताया उन्होंने 1993 से 2006 तक उनसे संगीत की शिक्षा ली। नौकरी के लिए विदेश तक गए, लेकिन गुरु का ज्ञान और संगीत का प्रेम उन्हें वापस खींच लाया। अब उन्होंने अपना जीवन संगीत को समर्पित कर दिया है। बताया कि गुरुजी स्कूल के समय में अपने शिष्यों को उनकी आवाज से और छूकर पहचान लेते थे और आज भी वह ऐसे ही अपने शिष्यों को पहचानते हैं।
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संगीत की शिक्षा दुनिया को देकर जाएंगे यही गुरु दक्षिणा
गायिका अंशु थपलियाल ने बताया कि उन्होंने कक्षा छह से संगीत की शिक्षा ली। गुरुजी ने शिक्षकों के आए पैसों के हिस्से को कभी नहीं लिया। दिखाई ना देने के बाद भी संगीत पर इतनी गहरी पकड़ ही असली साधना है। उनसे सीखकर आज हम नाम कमा रहे हैं। यही शिक्षा समाज को देखकर जाएंगे उनके लिए यही हमारी गुरु दक्षिणा होगी।