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नदियों में विस्फोट और करंट से खतरे में मछलियों का अस्तित्व, जंतु वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

Tue, 07 May 2019 07:18 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कर्णप्रयाग
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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गंगा और उसकी सहायक नदियों में मछलियों के अवैध शिकार के लिए करंट, डायनामाइट विस्फोट, ब्लीचिंग पाउडर से कई मछलियों की प्र्रजातियों का अस्तित्व खतरे में है। नदियों में विस्फोट के कारण पानी दूषित हो रहा है।

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अलकनंदा, पिंडर, आटागाड़, नंदाकिनी, मंदाकिनी, पूर्वी एवं पश्चिमी नयार नदियों में लगातार हो रहे डाइनामाइट विस्फोट, ब्लीचिंग पाउडर और करंट से महाशीर, ट्राउट और कॉड सहित कई प्रजाति की मछलियां मर रही हैं।
 

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इससे पर्यावरणविद् और जंतु वैज्ञानिक चिंतित हैं। मछलियों के अभाव से नदियों में बैक्टीरिया और फंगस की मात्रा बढ़ रही है। साथ ही जल प्रदूषण बढ़ने से लगातार नदियों का पानी दूषित हो रहा है। वाटर इकोलॉजी सिस्टम पर भी असर पड़ रहा है।

भूगोल वैज्ञानिक डा. राजेश नौटियाल और डा. राकेश गैरोला कहते हैं कि नदियों में होने वाले विस्फोट से जीव-जंतुओं को भारी नुकसान होता है। साथ ही कई दुर्लभ प्रजाति जीव-जंतुओं की नस्ल खत्म होने का भय भी बना रहता है।
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