आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस और कोरोना के गंभीर मरीजों को इलाज महंगा पड़ रहा है। अस्पताल में उपचार और सामान्य दवाएं तो उपलब्ध हैं, लेकिन महंगे इंजेक्शन बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं। यह इंजेक्शन के आयुष्मान योजना के तहत कवर न होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को यह दिक्कत आ रही है।
दरअसल, ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन एम्फोटेरिसिन-बी और कोरोना के गंभीर मरीजों को लगाया जा रहा टोसिलिजुमैब इंजेक्शन हजारों रुपये में मिल रहा है। डॉक्टरों की सलाह पर सीएमओ दफ्तर मूल्य लेकर यह इंजेक्शन उपलब्ध करा रहा है। फिलहाल एम्फोटेरिसिन-बी व टोसिलिजुमैब के इंजेक्शन का टोटा है। पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज तो हो रहा है, लेकिन टोसिलिजुमैब इंजेक्शन की एक खुराक 34 हजार रुपए से अधिक में पड़ रही है। वहीं, ब्लैक फंगस का एक इंजेक्शन 500 से पांच हजार रुपये में पड़ रहा है।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कोरोना के नोडल अफसर एवं वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस में फिलहाल दो तरह के इंजेक्शन मरीजों को दिए जा रहे हैं। जो सस्ता है, उसकी एक से दो हफ्ते तक रोजाना एक डोज देनी होती है। जबकि महंगा इंजेक्शन की पांच वायल तक देनी पड़ सकती हैं। सरकारी अस्पताल में यह इंजेक्शन निशुल्क दिए जा रहे हैं।
उधर, श्री महंत इंद्रेश अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन के बारे में 26 मई को अस्पताल प्रशासन व आयुष्मान प्रतिनिधियों के बीच बात हुई थी। आयुष्मान योजना के संबंधित अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि वे उच्चाधिकारियों से इस संबंध में बात कर रहे हैं। अभी यह इंजेक्शन आयुष्मान योजना के अंतर्गत अस्पताल को उपलब्ध नहीं हुए हैं। इस संबंध में आयुष्मान सेल को ई-मेल पर आवश्यक सूचना भेज दी है। ब्लैक फंगस के भर्ती मरीज को आयुष्मान योजना के अंतर्गत उपचार दिया जा रहा है, लेकिन आयुष्मान योजना के तहत यह इंजेक्शन मरीज को अभी उपलब्ध नहीं हो पा रहा हैं। इसकी सूचना ईमेल पर भेज दी गई है।