अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में ब्लैक फंगस से दो और गंभीर मरीजों की मौत हुई है। उत्तराखंड के देहरादून निवासी और उत्तरप्रदेश के बिजनौर निवासी दो मरीजों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एम्स में अब तक नौ संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वहीं संस्थान में ब्लैक फंगस के सात नए केस मिले हैं।
जानलेवा ब्लैक फंगस से एम्स में मौत का सिलसिला जारी है। एम्स ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि देहरादून निवासी 60 वर्षीय और उत्तरप्रदेश के बिजनौर निवासी 58 वर्षीय मरीज को संस्थान में गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था। दोनों मरीजों में जांच के बाद ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। बृहस्पतिवार को दोनों मरीजों की उपचार के दौरान मौत हो गई।
थपलियाल ने बताया कि संस्थान में ब्लैक फंगस के सात नए केस भी मिले हैं। उन्होंने बताया कि एम्स में अब तक 110 संक्रमितों में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। इनमें से नौ मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि दो मरीजों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किया गया। उन्होंने बताया कि म्यूकोरमाइकोसिस केयर वार्ड में वर्तमान में 99 संक्रमित भर्ती हैं।
उत्तराखंड में ब्लैक फंगस के खिलाफ जंग लड़ने के लिए प्रदेश सरकार को बृहस्पतिवार को ‘एंफोटेरिसिन-बी’ के 15 हजार इंजेक्शन मिल गए हैं। इन इंजेक्शन का उत्पादन सिडकुल रुद्रपुर की वीएचबी इंटरनेशनल फार्मा कंपनी कर रही है। रुद्रपुर से सुशीला तिवारी अस्पताल(एसटीएच) हल्द्वानी के लिए तीन हजार इंजेक्शन भेजे गए हैं। इसके अलावा दून मेडिकल कॉलेज को 10 हजार और डीजी हेल्थ कार्यालय देहरादून के लिए दो हजार इंजेक्शन भेजे जा रहे हैं।
कोरोना महामारी के बाद उत्तराखंड में अब ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऊधमसिंह नगर में पांच मरीजों में ब्लैक फंगस के लक्षण मिले हैं लेकिन इंजेक्शन और अन्य सुविधाएं न होने के कारण इलाज के लिए ब्लैक फंगस के मरीजों को ऋषिकेश एम्स या सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी भेजा जा रहा है। राज्य में सिर्फ 430 इंजेक्शन उपलब्ध होने के कारण ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज में दिक्कत हो रही थी।
अब सिडकुल रुद्रपुर की वीएचबी इंटरनेशनल फार्मा कंपनी से एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की पहली खेप मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक सुधीर कुमार ने बृहस्पतिवार शाम को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के लिए एंफोटेरिसिन-बी के तीन हजार इंजेक्शन भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि दून मेडिकल कॉलेज के लिए 10 हजार और डीजी हेल्थ कार्यालय के लिए एंफोटेरिसिन-बी के दो हजार इंजेक्शन भेजे जा रहे हैं।