संक्रमितों का इलाज देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के अस्पतालों में चल रहा है। अब तक ब्लैक फंगस से 11 मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि ब्लैक फंगस से पीड़ित नौ मरीज ठीक भी हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में ब्लैक फंगस के 15 और मरीज मिले हैं। अभी तक तीन जिलों में ही ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा मरीज एम्स ऋषिकेश में भर्ती है। देहरादून जिले में 126, नैनीताल में छह और ऊधमसिंह नगर जिले में एक ब्लैक फंगस का मामला सामने आया है।
प्रदेश में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने अब इलाज के लिए 12 डेडिकेटिड कोविड अस्पतालों को अधिकृत किया है। सरकार की ओर से सीधे ब्लैक फंगस के इंजेक्शन व दवाइयों कोविड अस्पतालों को भेजी जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के अन्य अस्पताल ब्लैक फंगस का इलाज करते हैं तो सरकार की तरफ से किसी तरह की कोई सहायता नहीं की जाएगी।
सुशीला तिवारी अस्पताल में ब्लैक फंगस के दो और संदिग्ध मरीज भर्ती हुए हैं। दोनों मरीजों की आंख में लाली के साथ ही अन्य लक्षण हैं। वहीं, किच्छा के ब्लैक फंगस के मरीज की हालत गंभीर बनी हुई है।
एसटीएच में पिछले सप्ताह नानकमत्ता के ब्लैक फंगस के मरीज की मौत हो गई थी। मरीज कोविड पॉजिटिव भी था। एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि दमुवाढूंगा हल्द्वानी निवासी 64 वर्षीय कोविड पॉजिटिव मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण भी हैं।
मरीज की हालत गंभीर है। चेहरे पर सूजन भी है। काशीपुर निवासी 63 वर्षीय मरीज की कोविड रिपोर्ट निगेटिव है। मरीज की आंखों में लाली के साथ सूजन जैसे लक्षण हैं। दोनों का इलाज शुरू कर दिया गया है। डॉ. जोशी ने बताया कि ब्लैक फंगस के इलाज में प्रयोग किए जाने वाले इंजेक्शन एम्फोटेरेसिन की बीस वॉयल आई हैं।