पत्र में कहा गया है कि प्रकरण की जानकारी होने पर मंदिर समिति के स्तर पर जल्द जांच कर बताया जाए। पर अभी तक कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। परंपराओं से जुड़े विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सक्षम स्तर से जल्द जांच की अनिवार्य रूप से बताया जाए। इस संबंध में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बैठक में सदस्यों ने कहा कि रूप छड़ी को बाहर ले जाने की परंपरा नहीं रही है। इससे बोर्ड सदस्यों में रोष था, रूप छड़ी को बाहर ले जाने की परंपरा भी नहीं रही है। तय अब रूप छड़ी देवभूमि से बाहर नहीं जाएगी। कैबिनेट मंत्री महाराज का पत्र मिला है, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
वर्ष-2000 में बाहर ले ले जाने की मांगी गई थी अनुमति
रूप छड़ी को देवभूमि से बाहर ले जाने की बात वर्ष 2000 में भी आई थी। उस समय बीकेटीसी के खंचाजी ने पत्र बीकेटीसी के ईओ को आख्या भेजी थी। इसमें कहा गया था कि रावल ने अपने आवेदन में दक्षिण भारत को ले जाने के लिए सामान की सूची दी है। वह परंपरा के अनुसार अभी तक मंदिर के खजाने से कभी बाहर नहीं दी गई है।