उत्तराखंड में कांग्रेस भले ही राष्ट्रपति शासन की कानूनी लड़ाई जीत जाने पर खुश हो, पर उसकी परेशानी का अंत फिलहाल होता नहीं दिख रहा है।
18 मार्च को विधानसभा में सदन के अध्यक्ष के खिलाफ दिया गया अविश्वास प्रस्ताव आने वाले सत्र में एक और खींचतान का सबब बन सकता है। भाजपा नए सिरे से अविश्वास प्रस्ताव लाने से भले ही इनकार कर रही हो, पर सदन में दिए गए पुराने अविश्वास प्रस्ताव का मामला उठाने से उसे गुरेज नहीं है। विधानसभा सूत्रों की माने तो भाजपा अगर इस अविश्वास प्रस्ताव पर जोर देती है तो सदन में इस पर बात भी हो सकती है।
रविवार को नैनीताल क्लब में मीडिया से मुखातिब, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और उपाध्यक्ष अनुसूइया प्रसाद मैखुरी के खिलाफ विधान सभा में अविश्वास प्रस्ताव लंबित है।
जब तक इस अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता तब तक दोनों नैतिक रुप से संवैधानिक पीठ में नहीं बैठ सकते। 21 और 22 जुलाई को प्रस्तावित विधान सभा सत्र में इसके लिए 20 जुलाई को दून में भाजपा विधायकों की बैठक में फैसला लिया जाएगा।