प्रतिपक्ष के नेता अजय भट्ट ने कहा कि जब तक गोविंद सिंह कुंजवाल स्पीकर की कुर्सी पर विरामजान रहेंगे, तब तक भाजपा के विधायक विधानसभा की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। इस निर्णय में बदलाव तभी संभव है जब इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का कोई निर्णय आ जाए।
उन्होंने कहा कि गलत तरीके से स्पीकर के खिलाफ लंबित अविश्वास प्रस्ताव को विपक्ष की गैर मौजूदगी में गिराया गया है। सदन में जो कुछ भी हुआ, वह विधानसभा की कार्य संचालन नियमावली का खुला उल्लंघन है।
विपक्ष की आवाज न सुनने का आरोप
विधानसभा में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में भट्ट ने कहा कि बृहस्पतिवार को जब विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर दिया तो अध्यक्ष की पीठ पर बैठे अधिष्ठाता ने विधायकों का नाम लेकर कहना शुरू कर दिया कि जो अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में है वह खड़ा हो जाए।
इसके बाद उन्होंने सत्ता पक्ष के विधायकों का हाथ उठवा कर इस प्रस्ताव को खारिज करा दिया, जो पूरी तरह से गलत है। कहा कि वैसे भी यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आवमानना है। सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों की अर्जी पर सुनवाई करते हुए बुधवार को ही कहा था कि स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के मामले का निस्तारण इसके साथ ही होगा।
भट्ट ने कहा कि सरकार ने विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही विनियोग बिल भी पास करा लिया है। इस पर बहस होनी चाहिए थी। सदन में विपक्ष की बात नहीं सुनी जा रही है, इसलिए हमने शुक्रवार को विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया।