भाजपा ने युवा चेहरे धामी को सत्ता की कमान थमाकर बड़ा दांव खेला है। उसका यह दांव मिशन 2022 के लिए कितना करामाती साबित होगा, ये आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन धामी के सामने सत्तारोधी रुझान और चुनावी साल में विपक्षी दलों की ओर से विरोध के तूफान उठने तय हैं। पार्टी में दिग्गज और खांटी नेताओं को साथ लेकर चुनावी समर में उतरना धामी के लिए आसान काम नहीं है। यहां उनके राजनीतिक कौशल की परीक्षा होगी।
धामी को सत्ता की बागडोर सौंपने के पीछे भाजपा का एक मात्र उद्देश्य 2022 के विधानसभा चुनाव जीतना है। लेकिन सियासी हालात पार्टी को उस मोड़ पर ले आए हैं कि उसे अपना तीसरा मुख्यमंत्री बनाना पड़ा है। पार्टी ने धामी पर दांव खेलकर एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। ये सभी निशाने पर मिशन 2022 के लक्ष्य को भेदने के लिए साधे गए। जानकार मानते हैं कि अब तक रहे मुख्यमंत्रियों में सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने जा रहे धामी पर भाजपा का यह दांव राज्य के 44 लाख से अधिक युवा वोटरों की साधने की रणनीति भी है।
उनका कहना है कि दो बार के विधायक को सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के पीछे पहला संदेश यही है कि भाजपा चुनाव में युवा मतदाताओं को अहमियत को समझती है। इसलिए उसने युवाओं के चेहरे पर चमक बिखरने के लिए कार्यवाहक मुख्यमंत्री से 20 हजार से अधिक नौकरियां खोलने की घोषणा कराई और अब युवा चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर उसने युवाओं को सत्ता में प्रतिनिधित्व देने का संदेश देने की कोशिश की। पार्टी यह जानती है कि प्रदेश में 7815192 मतदाताओं में 57 प्रतिशत हिस्सा युवा मतदाताओं का है। विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं की निर्णायक भूमिका मानी जाती है।
युवा कार्यकर्ताओं में दिया संदेश
धामी को विधानमंडल दल का नेता चुनकर भाजपा ने पार्टी के उन युवा कार्यकर्ताओं में भी उत्साह भरने की कोशिश की है, जो छात्र और युवा संगठनों में सक्रिय हैं और अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता करते हैं।
महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर होगी परीक्षा
विधानसभा चुनाव से पहले नए मुख्यमंत्री को महंगाई और बेरोजगारी सरीखे अहम सवालों के वाजिब जवाब तैयार करने होंगे। विपक्षी दल इन दोनों मुद्दों पर भाजपा और सरकार की घेराबंदी करेंगे। इन दोनों मुद्दों पर धामी की परीक्षा होगी।
सत्तारोधी रुझान का करना होगा सामना
मुख्यमंत्री बनने जा रहे पुष्कर सिंह धामी को अपनी सरकार में सत्तारोधी रुझान का सामना करना पड़ेगा। बेशक उनका सात से आठ महीने का कार्यकाल बचा है, लेकिन उनके हिस्से में पूरे सवा चार का सत्तारोधी रुझान भी आएगा।