लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण पर अक्सर एक कदम बढ़कर दो कदम पीछे हटने वाली भाजपा उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं को टिकट देने पर पसोपेश में नजर आ रही है।
कुल वोटरों के लगभग 50 फीसद महिला वोटरों वाले राज्य में पार्टी इस मुद्दे पर गुणा भाग में जुटी है। भाजपा महिला मोर्चा ने भी इस बार अधिक से अधिक महिलाओं को विधायकी का टिकट देने की पार्टी फोरम पर मजबूत पैरवी की है।
दरअसल, उत्तराखंड में कई विधानसभा सीट ऐसी हैं, जहां महिला वोटर चुनावी गणित बनाने बिगाड़ने की ताकत रखती हैं। भाजपा के भीतर भी एक बड़ा धड़ा इस बात का समर्थक है कि पार्टी को इस बार 33 फीसदी टिकट महिलाओं को देने की रणनीति अपनानी चाहिए। इससे मुख्य विरोधी दल कांग्रेस पर बढ़त हासिल भी की जा सकती है।
पार्टी में यह बात पिछले रिकार्ड को देखकर भी जोरशोर से उठ रही है। वर्ष 2007 के चुनाव में जहां कांग्रेस की पांच महिलाएं विधानसभा में पहुंची, वहीं यमकेश्वर (पौड़ी गढ़वाल) विधायक विजया बड़थ्वाल की भाजपा से एकमात्र महिला विधायक के रूप में मौजूदगी रही।
वहीं, भगवानपुर (हरिद्वार) उपचुनाव में भी जनता ने कांग्रेस की महिला प्रत्याशी ममता राकेश को विधायक बनाकर विधानसभा भेजा। सूत्रों के अनुसार, इसे लेकर पार्टी के अंदर धीरे-धीरे घमासान की स्थिति बन रही है। विरोध करने वाले कई नेताओं को डर है कि कहीं इस फार्मूले से उनका टिकट न रह जाय। पिछली बार भाजपा ने कुल 70 में से सात सीटों पर महिलाओं को विधायकी का टिकट दिया था।
वर्ष 2007 में वोटरों की स्थिति
पुरुष-3352984, महिला-3024346
वोट पड़े
पुरुष-2159501
महिला-2060193
‘प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर महिला वोटर निर्णायक की भूमिका में हैं। हमने आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक महिलाओं को टिकट देने की ठोस वकालत की है। इस बात को प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने भी रख दिया है।’
-नीलम सहगल, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा