बताया जाता है कि विधायक ने जिला अपर मुख्य अधिकारी और निदेशक को सुबह ही फोन कर यहां आने की सूचना दे दी थी। इसको देखते हुए जिला पंचायत कार्यालय में पीएसी और पुलिस बल को तैनात कर दिया था।
कार्यालय पहुंचकर विधायक प्रणव सिंह चैंपियन ने अपर मुख्य अधिकारी आरकेएन त्रिपाठी को बुलाकर बजट जारी कराने संबंधित निर्माण कार्य और सेलरी की फाइल मंगवाई। अपर मुख्य अधिकारी आरकेएन त्रिपाठी ने हाईकोर्ट का आदेश दिखाते हुए जिला पंचायत की समिति के अधिकार निरस्त होने की बात बताई।
विधायक चैंपियन ने उनको धमकाते हुए कार्यों में बाधा न डालने को कहा। इस दौरान विधायक ने अपने निजी सुरक्षा कर्मियों से कार्यालय के दरवाजे बंद करवा दिए और अपर मुख्य अधिकारी को बजट संबंधी फाइल मंगवाई।
इस दौरान चैंपियन ने संचालन समिति में सदस्य रहे मोहम्मद सत्तार और अमीलाल वाल्मीकि को भी बुला लिया। इस दौरान बजट संबंधी नोट सीट पर तीनों सदस्यों पर हस्ताक्षर किए और अपर मुख्य अधिकारी से भी हस्ताक्षर कराए।
कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन
- फोटो : AmarUjala
इसके बाद लेखाधिकारी से चैक तैयार कराए और उन पर तीनों सदस्यों ने हस्ताक्षर करे। इसके बाद अपर मुख्य अधिकारी आरकेएन त्रिपाठी से भी चैकों पर हस्ताक्षर कराने को कहा तो उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया।
इसी दौरान सभागार में मीडियाकर्मी प्रवेश कर गए और मौका मिलते हुए अपर मुख्य अधिकारी कार्यालय से निकलने में कामयाब रहे। यहां से वह सीधे रोशनाबाद स्थित कलेक्ट्रेट पहुचे और जिलाधिकारी दीपक रावत को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि 12 मार्च को हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार जिला पंचायत के संचालन के लिए कोई समिति नहीं है। जिस प्रकार से कार्यालय में हुए मामले से जिला अपर मुख्य अधिकारी ने उन्हें अवगत कराया है वह सीधे-सीधे हाईकोर्ट की अवहेलना हुई है। पूरे मामले से शासन को अवगत कराया जाएगा।
वहीं विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन ने कहा कि जिला पंचायत की संचालन समिति को निरस्त नहीं किया गया है। समिति को प्रशासनिक के साथ वित्तीय अधिकार हैं। जिसके तहत जिला पंचायत में स्टाफ की सेलरी और अन्य कार्यों के बजट संबंधी कार्य करने गए थे। किसी भी अधिकारी को बंधक नहीं बनाया गया। जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद सत्तार और अमीलाल वाल्मीकि ने कहा कि अभी उन्हें संचालन समिति के सदस्य की हैसियत से अधिकार प्राप्त है।