प्रदेश भाजपा के अनुशासनहीनता के नोटिस से भी भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की बेबाक बयानबाजी पर रोक नहीं लगी है। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के बाद से चैंपियन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर लगातार विवादित बयानबाजी कर रहे हैं।
मंगलवार को उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को प्रधानमंत्री न बनाए जाने को लेकर महात्मा गांधी पर निशाना साधा। उनके इस बयान से पार्टी फिर असहज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को उनके बयान से किनारा करना पड़ा है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस मामले में चैंपियन पर गाज गिर सकती है। जानकारों की मानें तो चार बार से विधायक चैंपियन भी इस बात को तो समझते ही होंगे कि उनके दिए बयानों के क्या परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में सियासी हलकों में ये सवाल तैर रहा है कि आखिर चैंपियन के मन में चल क्या रहा है?
सियासी जानकार चैंपियन के बयानों के निहितार्थ टटोलने में जुटे हैं। चैंपियन हरिद्वार जनपद की खानपुर विधानसभा से आते हैं। उनकी विधानसभा में 30 प्रतिशत मुस्लिम और 20 प्रतिशत अनुसूचित जाति की आबादी है। बकौल चैंपियन, उनके जिले में 60 फीसदी आबादी ओबीसी की है। चैंपियन के बयान भी इसी वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं। सवाल तैर रहा है कि क्या चैंपियन आंबेडकर को राष्ट्रपिता बनाने की पैरोकारी करके अनुसूचित जाति वर्ग में प्रभाव जमाना चाहते हैं? जिन्ना को पीएम बनाने का जिक्र छेड़कर क्या वे मुस्लिमों के दिल में जगह बनाना चाहते हैं।
हरिद्वार में मुस्लिम, अनुसूचित जाति व ओबीसी की बड़ी आबादी है। क्या चैंपियन का इरादा खुद को अपनी विधानसभा से बाहर हरिद्वार जनपद और प्रदेश के एक ऐसे नेता के तौर पर पेश करने का है, जिसके पीछे एक बड़ा वोट बैंक है? जितने मुंह उतने सवाल हैं। इन सवालों पर चैंपियन की सोच क्या है? ये वही जानते हैं, लेकिन जानकारों को फिलहाल चैंपियन का ये दांव चित भी मेरी और पट भी मेरी वाला ही नजर आ रहा है।
अब ये सोची समझी रणनीति के तहत हुआ या संयोग से, चैंपियन को इतना तो समझ में आ ही गया कि महात्मा गांधी, जिन्ना, राष्ट्रपिता या आंबेडकर के बहाने वे चर्चा में तो आ ही गए हैं। ऐसी सुर्खी उन्हें शायद ही किसी और मसले से मिलती। जानकारों का कहना है कि भाजपा विधायक ने अपनी पार्टी को धर्मसंकट में फंसा दिया है। पार्टी यदि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करती है, तो भी चैंपियन को फायदा है। माना जा रहा है कि ऐसा होने पर चैंपियन अनुसूचित जाति वर्ग की पैरोकारी के लिए शहीद कहलाएंगे।
मैं नेता नहीं समाज सेवक हूं। जो काम विवेकानंद ने किए, उसी तरह मैं भी समाज में परिवर्तन के लिए काम कर रहा हूं। राजनीति एक माध्यम है। मैंने पद की कभी इच्छा नहीं की। चैंपियन कभी सोच कर नहीं बोलता, चैंपियन बेबाक बोलता है।
-कुंवर प्रणव चैंपियन, विधायक, भाजपा