भाजपा के ही एक वरिष्ठ विधायक ने भ्रष्टाचार पर नियंत्रण न होने पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सुझाव दिए हैं।
शनिवार को विधायक हरभजन सिंह चीमा ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने सरकार द्वारा भ्रष्टाचार कर नियंत्रण नहीं कर पाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। चीमा ने कहा कि कांग्रेस शासन में प्रशासन भ्रष्टाचार में आकंठ डूब गया था, इसलिए जनता ने भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए भाजपा को प्रचंड बहुमत से जिताया है, लेकिन भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी नहीं सुधर रहे हैं।
चीमा ने मुख्यमंत्री को भेजे पांच सूत्रीय पत्र में कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आई है और न ही अफसरों में कोई डर है। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत भ्रष्चार के केंद्र बन गए हैं। लिहाजा जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत अध्यक्षों के चुनाव सीधे जनता से कराए जाएं।
जिला पंचायत और ग्राम पंचायतों में आय के संसाधनों को लेकर विसंगतियां है, उन्हे दूर किया जाए। चीमा ने नगर निगमों के मेयरों को वित्त अधिकार देने की मांग कर कहा कि केंद्र सरकार ने 74वां संविधान संशोधन कर मेयरों को वित्त अधिकार दिया है।
अनुपालन के लिए प्रदेश सरकारों को पत्र लिखा है। लेकिन उत्तराखंड सरकार ने भी संशोधन को अभी तक लागू नहीं कराया है। लिहाजा 74वां संविधान संशोधन जल्द लागू किया जाए।