फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आयुर्वेद विवि ने बीजेपी मंत्री की भांजी और पीआरओ की पत्नी को दिखाया बाहर का रास्ता, जानें पूरा मामला

Sun, 19 May 2019 05:20 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
हरक सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विज्ञापन

उत्तराखंड में आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की रिश्तेदार और पीआरओ की पत्नी को आखिरकार उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। नियमों को ताक पर रखकर इनकी नियुक्ति की गई थी। अमर उजाला ने चार अक्टूबर 2018 के अंक में ‘यह कैसा संयोग, सिर्फ मंत्री के करीबी योग्य’ शीर्षक से यह खबर प्रकाशित की थी।

विज्ञापन


आयुर्वेद विवि में इंजीनियर का एक पद सृजित कर इस पर आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की भांजी आंचल रावत को नियुक्ति दी गई थी। विवि ने गुपचुप वेबसाइट पर विज्ञापन जारी किया और भर्ती कर दी। किसी भी समाचार पत्र में यह विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया था। आयुष मंत्री के पीआरओ नरेंद्र सेमवाल की पत्नी पिंकी के लिए भी विवि में मेडिकल रिकॉर्ड टेक्नीशियन का पद बनाया गया था।

इस पद पर पिंकी को नियुक्ति दी गई थी। इस भर्ती के लिए भी वेबसाइट के विज्ञापन का ही सहारा लिया गया था। समाचार पत्र में कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया था। इसके अलावा पद न होने के बावजूद विवि में सुरक्षा कर्मचारी, गनमैन, पीएसओ का पद सृजित किया गया था। इसके लिए शासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
विज्ञापन


इन पदों पर सीधी भर्ती की गई थी। इस पर आयुर्वेद विवि के प्रभारी कुलसचिव रामजी शरण शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री के करीबियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। सुरक्षा कर्मचारी, गनमैन, पीएसओ को भी विवि से बाहर कर दिया गया है।

विज्ञापन

17 बिंदुओं पर होगी जांच

विवि में हुई गड़बड़ियों की 17 बिंदुओं पर जांच की जाएगी। प्रभारी कुलसचिव रामजी शरण शर्मा ने बताया कि विवि में कमतर सिक्योरिटी एजेंसी को ठेका देने से लेकर कैंटीन के ठेके और विभिन्न स्तरों पर की गई खरीद की भी जांच की जा रही है।

पहले भी विवादित रही नियुक्तियां
आयुर्वेद विवि में नियुक्तियों का यह विवाद पहला नहीं है। इससे पहले भी असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति विवादों के बाद तीन बार रद्द की गई थी। इसकी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक भी हुआ था। बाद में किसी तरह नियुक्तियां हो पाईं।

जो पद स्वीकृत नहीं थे उन पर भर्ती किए गए कर्मचारियों को निकाल दिया गया है। साथ ही शासन को लिखा गया है कि इन पदों को एक अप्रैल से सृजित किया जाए। ताकि, इन पर पुन: भर्ती की जा सके।
- रामजी शरण शर्मा, प्रभारी कुलसचिव आयुर्वेद विवि

मेरी पत्नी पिंकी आयुर्वेद विवि में कार्यरत थी। उन्हें हटा दिया गया है, इसकी जानकारी नहीं मिली है। जब पता चलेगा तो उसी हिसाब से कुछ कहा जा सकेगा। 
-नरेंद्र सेमवाल, पीआरओ, आयुष मंत्री
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें