वन मंत्री डॉ. रावत का कहना है कि पेशावर विद्रोह के महानायक वीरचंद्र सिंह गढ़वाली ने 23 अप्रैल 1930 को अमानवीय अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था। उनकी वीरता को देखते हुए महात्मा गांधी ने उन्हें गढ़वाली की उपाधि दी थी। उनकी वीरता को देखते हुए सरकार ने भी 21 जनवरी 1975 को बिजनौर जिले की साहनपुर रेंज के हल्दूखाता वन क्षेत्र में वन रक्षक चौकी के पास 10 हेक्टेयर जमीन 90 साल के लीज पर दी थी।
आज उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वे लीज शुल्क देने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में डीएफओ नजीबाबाद की ओर से उन्हें 30 अगस्त को शुल्क जमा कराने का नोटिस जारी कर दिया। शुल्क जमा नहीं करने की स्थिति में जमीन खाली करने की चेतावनी दी गई है।
डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया है कि वे उत्तराखंड के ही रहने वाले हैं और स्वतंत्रता सेनानी वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के परिवार के बारे में बखूबी जानते हैं। परिवार की समस्याओं को देखते हुए लीज शुल्क माफ किया जाए। साथ ही वन विभाग के उन अफसराें के खिलाफ कार्रवाई की जाए जिन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों को जमीन खाली करने का नोटिस जारी करने के साथ ही देश के इस महानायक का अपमान किया है।
आजादी की जंग में पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें भारत से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भेजने की गुजारिश की है।
उन्होंने ऐसा वन विभाग से जमीन खाली करने का नोटिस मिलने से नाराज होकर किया है। गढ़वाली के परिजनों का कहना है कि आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले गढ़वाली के योगदान को देखते हुए यूपी सरकार ने कोटद्वार के हल्दुखाता में उन्हें लीज पर कुछ जमीन दी थी।
आरोप है कि उत्तराखंड बनने के बाद से इस जमीन को लेकर वन विभाग की ओर से उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। बताया कि वन विभाग ने अतिक्रमणकारी घोषित कर उन्हें उक्त जमीन खाली करने का लिखित फरमान दे दिया है।
इससे आक्रोशित गढ़वाली के परिजनों का कहना है कि जब हमारे देश में ही हमें इतना लज्जित किया जा रहा है, तो इससे अच्छा यह होगा कि हमें पाकिस्तान भेज दिया जाए। उन्होंने यह गुजारिश कर प्रधानमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराया है।