हरक ने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ही तिवारी जी को मेरे निर्दोष साबित होने की सूचना दी थी और तिवारी जी ने रात 1 बजे मुझे यह जानकारी दी थी। क्लीन चिट मिलने के बाद भी तिवारी ने फिर कैबिनेट में न लेकर हरक की नाराजगी बढ़ा दी थी।
हरक ने कहा कि उन्होंने भाजपा नेताओं से बात की और अपनी ही सरकार गिराने की तैयारी कर ली थी। उन्होंने कहा कि 10-12 विधायक देहरादून भी पहुंच गए थे। इस बीच कांग्रेसी नेता विजय बहुगुणा शाम 4 बजे मेरे घर आए और मनाते रहे।
रात 11 बजे बहुगुणा मुझे तिवारी जी के आवास ले गए। मैंने उनको बहुत बुरा भला कहा। मैंने कहा कि आप धृतराष्ट्र बने हुए हैं। वे चुपचाप सुनते रहे लेकिन गुस्सा नहीं किया। मुझसे बहुत शालीनता से बात की और समझाया। गिले-शिकवे दूर हुए।
हरक ने यह भी कहा कि इस घटना के बाद तिवारी ने कहा कि तुम जो कहोगे वही करूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि तुम मंत्री नहीं हो लेकिन चुनाव जीतोगे। फिर मैंने जयहरीखाल, रुद्रप्रयाग और सतपुली के इलाके में 400-500 करोड़ की घोषणा की।
मेरी घोषणाओं से कांग्रेस सरकार में मंत्री नरेन्द्र सिंह भंडारी तिवारी जी से नाराज भी हुए कि एक विधायक इतनी घोषणाएं कैसे और क्यूं कर रहा है। इसी काम की बदौलत मैं 2007 में 5500 मतों से चुनाव जीत गया।
हरक यही नहीं रुके, बोले कि तिवारी ने मुझ पर विश्वास किया और ताकत दी। मंत्री हरक सिंह ने सरकार गिराने के खुलासे से पहले और बाद में तिवारी की तारीफ में खूब कसीदे भी पढ़े।