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बागियों का ‘गेम’ भाजपा को पड़ रहा भारी, बदल गया प्रचार ‘प्लान’ 

Sat, 10 Dec 2016 12:19 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
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कांग्रेस के 10 बागी एमएलए भाजपा के सदस्य बन गए थे। - फोटो : AmarUjala
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भाजपा के पाले में कांग्रेस से 10 बागी विधायक तो आए, लेकिन हाथ से कई मुद्दे भी छिटक गए। बागियों के आने का सियासी साइड इफेक्ट अब दिखने लगा है। भाजपा अपनी कांग्रेस विरोधी प्रचार नीति की ‘हार्डडिस्क’ से कांग्रेस के मार्च 2012 से लेकर फरवरी 2014 तक के कार्यकाल ‘डिलीट’ कर चुकी है।
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इस दौरान सदन से लेकर सड़क तक भाजपा जिन मुद्दों पर तत्कालीन सरकार को घेरती थी उनपर अब उसके नेताओं को मौन रहने के ऑर्डर हैं। केवल हरीश रावत कार्यकाल को ही कांग्रेस सरकार का कार्यकाल मान कर भाजपा परिवर्तन की बयार लाने में जुटी है।

इसी के चलते एक सोची समझी रणनीति के तहत भाजपा केवल मोदी के केंद्र में हुए ढाई साल को आधार बना कांग्रेस की ढाई साल वाली रावत सरकार को घेरने में जुटी है।
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बहुगुणा का जिक्र आते ही भाजपाइयों की याद्दाश्त हो रही कमजोर

कांग्रेस के बागियों ने थामा भाजपा का हाथ।
मार्च 2016 में भाजपा के पाले में कांग्रेस के दस विधायकों पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह, पूर्व कैबिनेट मंत्री अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल, कुंवर प्रणव चैम्पियन, सुबोध उनियाल, उमेश शर्मा, शैला रानी रावत, रेखा आर्य और प्रदीप बतरा शामिल हुए। उनके आने से खुद को मजबूत मानने वाली भाजपा अब कहीं रक्षात्मक भी दिख रही है।

चुनाव में कांग्रेस को घेरने के लिए जो भाजपा ने मुद्दे सहेज कर रखे थे उनकी अब बात करने से भी भाजपा नेता गुरेज कर रहे हैं। बहुगुणा के कार्यकाल का जिक्र आते है भाजपाइयों की याददाश्त कमजोर पड़ जाती है। जबकि उस दौर में भाजपा लगातार बहुगुणा पर हमलावर रही। सरकारी भूमि की बंदरबांट का आरोप में भाजपा ने बहुगुणा के परिवार तक को नहीं बक्शा था।

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह भी लगातार भाजपा के टारगेट पर रहे, लेकिन अब भाजपा बहुगुणा कार्यकाल का जिक्र नहीं करती दिख रही। भाजपा का प्रचार पूरी तरह से हरीश रावत सरकार पर है। वहीं कांग्रेस भी आरोपों के आधा होने से राहत में महसूस कर रही है।
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बहुगुणा सरकार पर थे ये आरोप 

विजय बहुगुणा - फोटो : AmarUjala
टिहरी विस्थापितों का पुनर्वास करने के लिए उन्हें भूमि आवंटन पट्टों में बड़ा गोलमाल होने का आरोप लगा था। भाजपा ने इसको लेकर तत्कालीन सीएम बहुगुणा सहित कुछ विधायकों पर भी निशाना साधा था। मामला उछलने के बाद जांच हुई। एक आईएएस अफसर पर इसकी गाज गिरी।

सिडकुल की भूमि को औने पौने दाम पर बेचने का आरोप भी बहुगुणा सरकार पर लगा। सदन में भाजपा विधायक मदन कौशिक ने दो बिल्डरों को हरिद्वार और पंतनगर में बेहद सस्ते दामों पर जमीन देने का मामला उठाया। सरकार इसपर घिरी रही।

जून 2013 की आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में लापरवाही बरतने का मामला भाजपा तत्कालीन सीएम बहुगुणा के पद से हटने तक लगाते रहे। उनके हटने के बाद भी भाजपा इस मुद्दे को तूल देती रही, लेकिन जैसे वह भाजपा में आए मुद्दा गायब हो गया।

बहुगुणा सरकार में कैबिनेट मंत्री अमृता रावत किसानों के लिए पॉलीहाउस सब्सिडी के मामले में घिरी। चहेतों को सब्सिडी देने के मामले में भाजपा ने सदन में तत्कालीन उद्यान मंत्री से इस्तीफा तक मांगा।

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर अपने विधानसभा क्षेत्र रुद्रप्रयाग को लगभग 6 करोड़ रुपये तराई बीज विकास निगम और उपनल से दिए जाने का आरोप है। भाजपा प्रतिनिधिमंडल राजभवन तक मामले को लेकर गया। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत उपनल के माध्यम से नौकरियां चहेतों को देने के मामले में घिरे रहे।

भाजपा ने बहुगुणा समय के कार्यकाल में कई मुद्दों को सदन में उठाया। हमारी मांग पर उनकी जांच तक हुई, जिसके बाद सबमें क्लीन चिट दी गई। जब वह बेदाग साबित हुए तो उस दौर के मुद्दों को उठाने का कोई मतलब नहीं। रावत सरकार के मुद्दे हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि विपक्ष की मांग के बावजूद कोई जांच नहीं हो रही। रावत सरकार के समय के आपदा, मोटो कार्पस, नारी निकेतन, चावल भंडारण जैसे मुद्दों की सीबीआई जांच होनी चाहिए। 
- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष 
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