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उत्तराखंड में बचेगा या टूटेगा मोदी का तिलिस्म?

Fri, 13 Jan 2017 08:01 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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नरेंद्र मोदी
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उत्तराखंड के चुनावी समर में भाजपा और कांग्रेस के बीच सिर्फ हार और जीत ही तय नहीं होगी। ये चुनाव संसदीय चुनाव में कांग्रेस का क्लीन स्वीप करने वाले मोदी के करिश्मे से भी पर्दा उठाएंगे। यही वजह है कि सियासी हवाओं में ये सवाल तैर रहा कि इन चुनाव में मोदी मैजिक बरकरार रहेगा या टूट जाएगा। बहरहाल, भाजपा के सामने दोहरी चुनौती है। उसे सत्ता बनाने के साथ-साथ मोदी के जादू को बचाए रखना है।
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दरअसल,  लोकसभा चुनाव में छाया ‘मोदी मैजिक’ तीन साल में कितना घटा या बढ़ा, इसका फैसला विधानसभा चुनाव से हो जाएगा। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी प्रधानमंत्री का चेहरा थे। पर भाजपा विधानसभा चुनाव में भी उनके चेहरे को आगे लाकर चुनावी समर में उतरने जा रही है। ऐसे में वर्ष 2014 में भाजपा को मिले बंपर 54.5 प्रतिशत वोट तक पहुंचना पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को बढ़त दिलाने वाली विधानसभा सीटों के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो 70 सीटों में से 63 पर भाजपा आगे थी, जबकि सात विधानसभाएं मोदी लहर की सुनामी से अछूती रहीं। ये दीगर बात है कि विधानसभा चुनाव में अभी तक कोई दल वोट शेयर में 35 के पार नहीं गया है। भाजपा 27 दिसंबर को दून के परेड ग्राउंड में हुई पीएम मोदी की रैली में उमड़े जनसैलाब के बाद काफी हद तक प्रदेश में कमल खिलने के प्रति आश्वस्त दिख रही है।
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मोदी मंत्र के सहारे ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाना है

विजय बहुगुणा - फोटो : ANI
केंद्रीय लीडरशिप भी साफ कर चुकी है कि मोदी मंत्र के सहारे ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाना है। पार्टी इस फार्मूले पर काम कर रही है कि पीएम वोट दिला देंगे, सीएम बाद में किसी को बना दिया जएगा। वर्ष 2014 चुनाव से पहले पांचों सांसद प्रदेश में कांग्रेस के थे, जो मोदी लहर में भारी अंतरों से हार गए। लोकसभा चुनाव में अल्मोड़ा छोड़कर शेष सभी चार सीटों पर एक लाख से अधिक का अंतर भाजपा और कांग्रेस में रहा।

लोकसभा चुनाव के लगभग पौने तीन साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं लेकिन दोनों में एक बात समान यह है कि भाजपा का चेहरा नरेंद्र मोदी ही हैं। वहीं कांग्रेस के तारणहार के रूप में एकमात्र मुख्यमंत्री हरीश रावत ही नजर आ रहे हैं। भाजपा में चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा के होते हुए सीएम का कोई चेहरा नहीं है।

पार्टी के प्रचार के दो चरण पूरे हो चुके हैं, जिनमें परिवर्तन यात्रा के दौरान पूरी तरह प्रचार केंद्र की उपलब्धियों और पीएम मोदी के फैसलों पर केंद्रित रहा। दूसरे चरण की शुरुआत पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर अटल संदेश से की गई। प्रचार में केंद्रीय मंत्री आगे रहे जबकि प्रदेश संगठन और नेता सिर्फ रैलियों में भीड़ जुटाने का काम करते ही नजर आए।

‘अटल ने बनाया मोदी सवारेंगे’

बीसी खंडूड़ी - फोटो : AmarUjala
वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीएम चेहरा बीसी खंडूड़ी को बनाया था, जिसमें ’खंडूड़ी है जरूरी’ का नारा दिया गया। अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पहले प्रचार रैली में नारा दे दिया कि ‘अटल ने बनाया, मोदी सवारेंगे’।

इस नारे ने साफ कर दिया कि उत्तराखंड के गठन में तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अहम भूमिका को रखकर राज्य गठन की ठंडी पड़ चुकी जनभावना को कुरेदा जाए। बीच के 16 वर्ष में पार्टी की दो बार रही सरकार की उपलब्धियों को गौण कर पार्टी अब राज्य का बेहतर भविष्य पीएम मोदी की कमान में दिखा रही है।

उपचुनाव में टूटा था तिलिस्म
लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को जिन विधानसभा सीटों से बढ़त मिली थी, उनपर पार्टी उपचुनाव में हारी। विधानसभा क्षेत्र धारचूला, सोमवेश्वर और डोईवाला के उपचुनाव में भाजपा को झटका लगा। चौंकाने वाला तथ्य तो इस उपचुनाव में यह रहा कि डोईवाला मौजूदा संसद रमेश पोखरियाल निशंक की सीट थी। जबकि सोमवेश्वर विधानसभा केंद्रीय राज्य मंत्री टम्टा की सीट थी। इसके बाद दूसरे उपचुनाव भगवानपुर सीट पर भी भाजपा को हार मिली। हालांकि इस सीट पर लोकसभा चुनाव में भी भाजपा पीछे रही थी।
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2014 में संसदीय क्षेत्रों का हाल

चुनाव - फोटो : demo pic
टिहरी - 14 विधानसभाओं से केवल चकराता सीट पर भाजपा पिछड़ी
पौड़ी - सभी 14 विधानसभा क्षेत्रों में रहे आगे।
हरिद्वार - 14 विधानसभाओं से ज्वालापुर, भगवानपुर, कलियर और मंगलौर सीट में पिछड़ी भाजपा।
नैनीताल - सभी 14 विधानसभा क्षेत्रों में रहे आगे।
अल्मोड़ा - 12 विधानसभाओं में आगे रही, जबकि जागेश्वर और धारचूला सीट से भाजपा पिछड़ी।

विधानसभा चुनावों में मतप्रतिशत
वर्ष 2002 - भाजपा 25.81, कांग्रेस 26.91
वर्ष 2007- भाजपा 31.6, कांग्रेस 29.9
वर्ष 2012 - भाजपा 33.13, कांग्रेस 33.13
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