कौशिक अपने साथ शनिवार को जिस तरह से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत को शहजाद के घर लेकर गए, उसे राजनीति के जानकार बहुत सामान्य नहीं मान रहे हैं।
एक जमाने में हरिद्वार जिले में बसपा विधानसभा की आठ सीटें जीतकर अपनी ताकत का अहसास करा चुकी है। बसपा के बडे़ नेताओं की हरिद्वार में बात करें, तो शहजाद का नाम प्रमुखता से आज भी इनमें शुमार है। इसलिए बसपा को कमजोर करने या फिर भाजपा को मजबूत करने की कवायद के बीच में शहजाद की एक अलग भूमिका निकलकर आती है।
पूरी तस्वीर का एक पहलू और भी है। हरिद्वार लोस सीट के लिए उम्मीदवार बतौर मदन कौशिक का नाम भी उभरता रहा है। संजय गुप्ता, यतीश्वरानंद जैसे विधायक कौशिक के सीधे तौर पर खिलाफ हैं। आज तो इन दोनों ही विधायकों ने सरकार पर अपने-अपने अंदाज में हमले भी किए हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो रही कि इन हालात में शहजाद को अपने पाले में खींचकर एक तीर से कई निशाने साधने की राह पर भी कौशिक आगे बढ़ सकते हैं।