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बागियों ने छुड़ाए भाजपा और कांग्रेस के पसीने

Mon, 30 Jan 2017 12:15 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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सतपाल महाराज - फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव में बागियों ने भाजपा और कांग्रेस लीडरशिप के पसीने छुड़ा दिए हैं। दोनों दलों में करीब एक दर्जन सीटों पर टिकट काटे जाने से नाराज दावेदारों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
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भाजपा में तो सीएम की रेस में दिख रहे कुछ दावेदार इस बगावत से संकट में आते दिख रहे हैं। उधर, कांग्रेस में सीएम हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की सीट पर बागियों ने निर्दलीय के रूप में ताल ठोंककर जीत और हार के समीकरणों को उलझा दिया है।

सूत्रों की मानें तो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल में सफलता न मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं, कांग्रेस आलाकमान ने असंतुष्टों को समझाने के लिए दिल्ली से नेताओं को झोंक दिया है। नाम वापसी की तिथि यानी 31 जनवरी तक अगर दोनों दल बगावत नहीं थाम पाए तो कुछ सीटों पर उलटफेर हो सकता है।
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भाजपा के दिग्गजों में सतपाल महाराज, अजय भट्ट, यशपाल आर्य, शैलेंद्र मोहन सिंघल, सुबोध उनियाल, शैलारानी रावत, गोपाल रावत जैसे कई दिग्गजों की सीटों पर बागी निर्दलीय पर्चा भर चुके हैं। डैमेज कंट्रोल में अभी तक सिर्फ यमकेश्वर सीट पर ही भाजपा को विजय बड़थ्वाल को मनाने में कामयाबी मिली है। वहीं, कांग्रेस का दावा है कि 15 असंतुष्टों को मना चुके हैं, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए।

प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की सीट सहसपुर पर पार्टी से बगावत कर आर्येंद्र शर्मा नामांकन कर चुके हैं। किच्छा में शिल्पी अरोड़ा सीएम हरीश रावत के विरोध में उतर आई हैं। कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और प्रीतम सिंह भी बगावत का दंश झेल रहे हैं। इसके अलावा विधानसभा रुद्रप्रयाग, यमकेश्वर और ज्वालापुर में कांग्रेस के असंतुष्टों ने निर्दलीय उतर कर पेच फंसा रखा है। दोनों दलों के पास निर्दलियों को मनाने के लिए अधिक समय नहीं है।

एक फरवरी को नामांकन वापसी की तिथि है और इससे पहले निर्दलियों को मनाने में दोनों दल अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगे हैं। सूत्रों की मानें तो दिल्ली से भी निर्दलियों को फोन कर समझाया जा रहा है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद डैमेज कंट्रोल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उधर, कांग्रेस में सीएम हरीश रावत विरोध को शांत करने में जुटे हैं। उनकी मदद के लिए केंद्र से नेताओं को भेजा जा रहा है।

भाजपा
- चौबट्टाखाल सीट पर सतपाल महाराज के खिलाफ कविंद्र इष्टवाल
- रानीखेत सीट पर प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के खिलाफ प्रमोद नैनवाल
- शैलेंद्र मोहन सिंघल के खिलाफ जसपुर में सीमा चौहान
- केदारनाथ सीट पर शैलारानी के खिलाफ आशा नौटियाल
- नरेंद्र नगर में सुबोध उनियाल के खिलाफ ओम गोपाल
- कालाढूंगी में बंशीधर के खिलाफ हरेंद्र सिंह
- बाजपुर में यशपाल आर्य के खिलाफ सुनीता टम्टा
- गंगोत्री में गोपाल रावत के खिलाफ सूरत राम नौटियाल

कांग्रेस
- सहसपुर में किशोर उपाध्याय के खिलाफ आर्येन्द्र शर्मा
- किच्छा सीट पर सीएम हरीश रावत के खिलाफ शिल्पी अरोड़ा
- धनोल्टी सीट पर प्रीतम पंवार के समर्थन देने के खिलाफ मनमोहन मल्ल
- देवप्रयाग सीट पर मंत्री प्रसाद नैथानी के खिलाफ शूरवीर सजवाण
- यमकेश्वर में शैलेंद्र रावत के खिलाफ रेनू बिष्ट
- ज्वालापुर में शीशपाल सिंह के खिलाफ बृज रानी
-  बागेश्वर सीट पर बाल कृष्ण के खिलाफ रंजीत दास
-  रुद्रप्रयाग सीट पर लक्ष्मी राणा के खिलाफ जिलाध्यक्ष प्रदीप थपलियाल

नाम वापसी तक पार्टी सभी असंतुष्टों को मनाने में कामयाब रहेगी। पार्टी लगभग एक दर्जन असंतुष्टों को अभी तक मना चुकी है। अभी कुछ सीटों पर कई स्तरों पर वार्ता चल रही है। उम्मीद है विरोध पूरी तरह शांत कर लिया जाएगा। 
- किशोर उपाध्याय, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय उतरे कार्यकर्ताओं को मनाने की प्रक्रिया चल रही है। कई जगह हमें कामयाबी मिली है। उम्मीद है नाम वापसी तक सभी को मना लिया जाएगा। जो नहीं मानेंगे, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई करना मजबूरी होगी।
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- अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
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